केजीएमयू बनेगा टेलीमेडिसिन का सेंटर आफ एक्सीलेंस, यूपी सरकार ने दी मंजूरी

लखनऊ 18 दिसम्बर (वार्ता) उत्तर प्रदेश सरकार ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में टेलीमेडिसिन सेवाओं के लिये उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर आफ एक्सीलेंस) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह केंद्र राज्यभर में ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म 2.0 के माध्यम से दी जा रही टेली-परामर्श सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

इस प्रस्ताव को केजीएमयू की टेलीमेडिसिन यूनिट की नोडल इंचार्ज डॉ. शीतल वर्मा द्वारा कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के मार्गदर्शन में तैयार कर शासन को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस परियोजना को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) से अनुदान सहायता भी प्राप्त हुई है, जिससे इसके प्रभावी संचालन में सहयोग मिलेगा।
स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत केजीएमयू में टेलीमेडिसिन सेवाओं के लिए एक विशेष उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही टेली-परामर्श की गुणवत्ता की निगरानी के लिए मेंटर्स और ग्रुप प्रैक्टिस मैनेजर्स की तैनाती की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रशिक्षण सामग्री और मानक संचालन प्रक्रियाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही नैदानिक गुणवत्ता और दस्तावेजीकरण की जांच के लिए गुणवत्ता ऑडिट और मूल्यांकन की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अलावा विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार, नई टेलीमेडिसिन तकनीकों और नवाचारों की पहचान तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और सी-डैक (सी-डीएसी) जैसी संस्थाओं के साथ समन्वय भी इस परियोजना का हिस्सा होगा।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि टेली-परामर्श की गुणवत्ता में सुधार से मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, संसाधनों का सही उपयोग होगा और शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि इस प्रस्ताव की स्वीकृति उत्तर प्रदेश में टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि रणनीतिक सहयोग और समन्वित प्रयासों से राज्य के हर नागरिक तक समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि परियोजना का क्रियान्वयन शीघ्र ही चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा, ताकि इसका दीर्घकालिक और सतत लाभ मिल सके। इस परियोजना में जपाइगोऔर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2020 से अब तक टेलीमेडिसिन के जरिये 784401 मरीजों को लाभ मिल चुका है।

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