प्रयागराज मे पाँच हजार छात्र गाएंगे वन्दे मातरम्
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा हिन्दू आध्यात्मिक सेवा संस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय अध्यकक्ष प्रोफेसर गिरिश चंद्र त्रिपाठी गिरीश चंद्र ने प्रेसवार्ता मे बताया कि सांस्कृतिक एवं नैतिक प्रशिक्षण संस्थान और हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान प्रयागराज द्वारा देशभक्ति भाव जगाने के लिए सामूहिक पूर्ण वन्दे मातरम् गायन समारोह का आयोजन किया जा रहा है | उन्होंने कहा कि छात्रों और नोवजवानों मे राष्ट्रभक्ति कि भावना बढ़ने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने मे यह कार्यक्रम प्रेरणदायी होगा |
श्री त्रिपाठी ने बताया कि 7 नवम्बर 1876 को बंगाल के कांतल पड़ी गाँव मे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्यय ने से “वन्दे मातरम् “ की रचना की थी | उन्होंने बताया कि 1882 मे यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ मे शामिल हुआ | 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार काँग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन मे इसे बंगाली शैली मे लय और संगीत के साथ गया | इस गीत के शुरुआती दो पद संस्कृत मे और बाकी पद बग्ला भाषा मे है | 1905 मे बंग –भंग आंदोलन मे “वन्दे मातरम् “राष्ट्रीय नारा बना | 1906 मे इसे नागरी लिपि मे प्रस्तुत किया गया और गटोरे ने इसका संशोधित रूप दिया |
उन्होंने बताया कि मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य , मुख्य वक्ता गुड़वंत सिंह कोठारी , विशिस्ट अतिथि पद्मश्री डाक्टर सोमा घोष होंगी यह कार्यक्रम भारत स्काउट गाइड इन्टर कॉलेज ममफोर्डगंज मे आयोजित होगा |

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