स्वीट कॉर्न की खेती से दोगुनी हो रही किसानों की आय
गोरखपुर 08 दिसंबर (वार्ता) खेती में लागत कम लगे और मुनाफा ज्यादा हो किसान ही नहीं बल्कि सरकार भी यही चाहती है जिससे जुड़कर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक के कुछ किसानों ने कमाल कर दिखाया है।
आमदनी बढ़ाने को पारंपरिक फसलों की खेती के साथ किसान कुछ नवाचार आधारित फसलीय कार्य भी करें इसके लिए सरकार सतत प्रोत्साहन दे रही है। योगी सरकार का त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम ऐसे ही प्रोत्साहन का हिस्सा है जिससे जुड़कर गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक के कुछ किसानों ने कमाल कर दिखाया है।
सरकार से बीज पर मिले 90 प्रतिशत अनुदान से इन किसानों ने स्वीट कॉर्न की खेती कर एक फसली सत्र में दोगुनी आय अर्जित कर नजीर पेश की है।
गोरखपुर जिले के ब्रह्मपुर ब्लॉक में आकिब जावेद कृषक उत्पादक संगठन ;एफपीओ से जुड़े कुछ किसानों ने बीते खरीफ सीजन में आठ एकड़ के क्लस्टर में स्वीट कॉर्न की खेती की। इसमें साथ मिला कृषि विभाग और सरकार के त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम का। इस कार्यक्रम से किसानों को सबसे बड़ा फायदा बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान का मिला। एफपीओ के संचालक आकिब जावेद बताते हैं कि स्वीट कॉर्न का बीज बाजार में 3200 रुपये प्रति किलो मिलता है। सरकार भरपूर सब्सिडी नहीं देती तो बीज ही खरीदना मुश्किल था। सरकार के साथ से यह बीज सिर्फ 10 फीसद पर मिल गया।
एफपीओ से जुड़े ब्रह्मपुर ब्लॉक के श्रीराम, भीमसेन, विजेंद्र, राजेश प्रताप आदि किसानों ने ग्राम पुरनहा और सुगहा में कुल 8 एकड़ क्लस्टर में स्वीट कॉर्न की खेती की। इन किसानों का कहना है कि वे खरीफ में धान और सामान्य मक्का की खेती तो पहले से करते थे लेकिन स्वीट कॉर्न उपजाने का यह पहला प्रयास था। शुरू में थोड़ी हिचक थी लेकिन जो नतीजा आया वह शानदार है। बीज पर 90 प्रतिशत अनुदान मिलने से प्रति एकड़ लागत काफी कम, आठ से दस हजार रुपये के बीच ही रही। इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर फसल प्रबंधन की बारीकियां सिखाईं। ढाई माह में फसल तैयार हुई और प्रति एकड़ औसतन 40 क्विंटल उपज प्राप्त हुई।
उत्पादित स्वीट कॉर्न एफपीओ के माध्यम से स्थानीय व्यापारियों के स्तर पर ही हाथोंहाथ 30 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक गई। कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह के अनुसार स्वीट कॉर्न उपजाने वाले किसानों को दोगुनी आमदनी हुई है। इन किसानों से प्रति एकड़ एक लाख से सवा लाख रुपये की आय अर्जित की है जो धान जैसी पारंपरिक फसल की तुलना काफी अधिक है।
कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह बताते हैं कि गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में स्वीट कॉर्न की खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक विकल्प है। बीज पर भारी अनुदान मिलने से इसमें लागत कम आती है और यह फसल कम समय ;दो से ढाई माहद्ध में तैयार होकर काफी मुनाफा देती है। स्वीट कॉर्न की भरपूर मांग रेस्टोरेंट व फूड चेन में होने से बाजार मिलने की भी दिक्कत नहीं है।
एफपीओ के संचालक आकिब जावेद का कहना है कि त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के माध्यम से योगी सरकार का भरपूर साथ मिलने से स्वीट कॉर्न पैदा करने वाले किसानों के जीवन में दोगुनी आय की मिठास घुल गई है। उम्मीद है कि ब्रह्मपुर ब्लॉक में स्वीट कॉर्न की प्रायोगिक खेती से अन्य किसानों का रुझान भी इस तरफ बढ़ेगा।
उत्पादित स्वीट कॉर्न एफपीओ के माध्यम से स्थानीय व्यापारियों के स्तर पर ही हाथोंहाथ 30 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक गई। कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह के अनुसार स्वीट कॉर्न उपजाने वाले किसानों को दोगुनी आमदनी हुई है। इन किसानों से प्रति एकड़ एक लाख से सवा लाख रुपये की आय अर्जित की है जो धान जैसी पारंपरिक फसल की तुलना काफी अधिक है।
कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह बताते हैं कि गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में स्वीट कॉर्न की खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक विकल्प है। बीज पर भारी अनुदान मिलने से इसमें लागत कम आती है और यह फसल कम समय ;दो से ढाई माहद्ध में तैयार होकर काफी मुनाफा देती है। स्वीट कॉर्न की भरपूर मांग रेस्टोरेंट व फूड चेन में होने से बाजार मिलने की भी दिक्कत नहीं है।
एफपीओ के संचालक आकिब जावेद का कहना है कि त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के माध्यम से योगी सरकार का भरपूर साथ मिलने से स्वीट कॉर्न पैदा करने वाले किसानों के जीवन में दोगुनी आय की मिठास घुल गई है। उम्मीद है कि ब्रह्मपुर ब्लॉक में स्वीट कॉर्न की प्रायोगिक खेती से अन्य किसानों का रुझान भी इस तरफ बढ़ेगा।

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