कानून का राज उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत : योगी

लखनऊ, 28 दिसंबर (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का राज उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। इसी ने प्रदेश से असुरक्षा का भाव खत्म किया, विश्वास का वातावरण बनाया और यूपी को निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बनाया है। रविवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित ‘पुलिस मंथन’ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन–2025 के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज देशभर में यूपी मॉडल की चर्चा है और यह बदलाव पुलिस की पेशेवर, निष्पक्ष और संवेदनशील कार्यप्रणाली का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस मंथन जैसे अभिनव प्रयास के लिए डीजीपी और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। इस अवसर पर पदक अलंकरण समारोह में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने दो दिनों में हुए सभी 11 सत्रों की चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंथन भविष्य की चुनौतियों के लिए ठोस रोडमैप तैयार करता है।
उन्होने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और पुलिस अधिकारियों को उनसे नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए। थानाध्यक्ष, सर्किल इंचार्ज, जिला कप्तान से लेकर जोन और रेंज स्तर तक के अधिकारी जनप्रतिनिधियों, धर्माचार्यों, उद्यमियों और व्यापारियों से संवाद करें। इससे जमीनी हकीकत सामने आती है। उन्होंने कहा कि केवल त्योहारों पर पीस कमेटी की बैठकें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि निरंतर संवाद जरूरी है।
योगी ने ह्यूमन इंटेलिजेंस को पुलिस का सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने कहा कि जनता दर्शन के माध्यम से उन्हें जमीनी सच्चाई का पता चलता है और अधिकांश सूचनाएं ह्यूमन इंटेलिजेंस से ही सामने आती हैं। फरियादी केवल शिकायत नहीं करता, बल्कि उसकी पीड़ा से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है।
थाना, सर्किल और पुलिस लाइन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना होने पर केवल थाना प्रभारी को जवाबदेह ठहराना पर्याप्त नहीं है। यदि तीनों स्तरों के बीच बेहतर तालमेल हो, तो सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस का दोस्ताना व्यवहार और संवेदनशीलता आमजन की समस्याओं का समाधान करती है और पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस को कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी है और राजनीतिक हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा गया है। पहले बार-बार तबादलों से व्यवस्था प्रभावित होती थी, लेकिन अब औसतन दो वर्ष का कार्यकाल देकर स्थिरता लाई गई है, जिससे अधिकारी क्षेत्र की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति को बेहतर समझ पाते हैं।
उन्होंने कहा कि अच्छे अधिकारी के तबादले पर जनता सिफारिश करती है, जबकि गलत अधिकारी के हटने पर धन्यवाद देती है। इसलिए पुलिस अधिकारियों को अपने आचरण और व्यवहार से अपनी पहचान बनानी चाहिए।
विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक देश को विकसित बनाने में राज्यों की भी बड़ी भूमिका है। यूपी में बीते साढ़े आठ वर्षों में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ, तभी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ। आज देश का 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे यूपी में है, सबसे बड़ा एयर कनेक्टिविटी नेटवर्क, 16 हजार किमी का रेल नेटवर्क, सबसे अधिक शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल और वाटरवे—all यह दर्शाते हैं कि सुरक्षा विकास की शर्त है।
उन्होने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘स्मार्ट पुलिस’ विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टिक एंड सेंसिटिव, मॉडर्न एंड मोबाइल, अलर्ट एंड अकाउंटेबल, रिलायबल एंड रिस्पॉन्सिव तथा टेक्नोसेवी एंड ट्रेंड—ये मंत्र भविष्य की चुनौतियों का मार्गदर्शन करते हैं और इन्हें पुलिस को अपने कार्य का हिस्सा बनाना होगा।
मुख्यमंत्री ने पुलिस ढांचे में हुए ऐतिहासिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जर्जर बैरकों में जवान रहने को मजबूर थे, लेकिन अब हाईराइज पुलिस भवन, नई पुलिस लाइनें और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। महिला वाहिनियों का गठन, मिशन शक्ति, साइबर मुख्यालय और मॉडल थानों से पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त किया गया है।
उन्होने कहा कि ‘पुलिस मंथन’ केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन का आधार है। बदलती चुनौतियों के अनुरूप पुलिस को निरंतर अपडेट रहना होगा। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता न्याय आधारित व्यवस्था की नींव हैं, जिनकी जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, निदेशक एसपीजी आलोक शर्मा, पुलिस महानिदेशक (कारागार) पीसी मीणा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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