सच्ची निस्वार्थ भक्ति इच्छाओं से परे मोक्ष की ओर ले जाती है: पं हेमंत उपाध्याय

गोरखपुर।काशी से पधारे कथा व्यास पंडित हेमंत उपाध्याय ने आवास विकास कालोनी झारखण्डी राम कथा के चौथे दिन कहा कि सच्ची निस्वार्थ भक्ति कितनी शक्तिशाली होती है कि वह  इच्छाओं से परे जाकर मोक्ष की ओर ले जाती है।

  कथा के चौथे दिन व्यास पंडित हेमंत उपाध्याय ने कथा को स्वर्ण कराते हुए कहा कि राम गमन का रसपान कराते हुए कहा कि यह बात बिल्कुल सही है कि केवट की निर्मल और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान राम ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था। क्योंकि केवट ने अपनी सेवा के बदले धन-संपत्ति नहीं, बल्कि जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति (मोक्ष) और प्रभु के चरणों में शाश्वत स्थान मांगा था, जिसे भगवान ने स्वीकार कर उसे इस संसार से पार उतार दिया। 

  उन्होंने कथा में कहा कि केवट ने भगवान राम को गंगा पार कराने के बदले उतराई में अंगूठी लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह मानता था कि राम और वह एक ही पेशे के हैं (एक जीवन-नैया पार लगाते हैं, दूसरा भवसागर पार कराते हैं। केवट ने धन या स्वर्ग नहीं, बल्कि प्रभु के चरण धोकर और उनसे भवसागर पार कराने का वरदान मांगा, जो उसकी सच्ची और निस्वार्थ भक्ति को दर्शाता है।

 कथा वाचक पंडित श्री उपाध्याय ने कहा कि मोक्ष की प्राप्ति: भगवान राम केवट की इस अनूठी भक्ति से इतने अभिभूत हुए कि उन्होंने उसे गले लगाया और वरदान दिया कि वह इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाएगा और उसे पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग बताता है कि सच्ची, निस्वार्थ भक्ति कितनी शक्तिशाली होती है और कैसे यह भौतिक इच्छाओं से परे जाकर मोक्ष की ओर ले जाती है।इसे संत और विद्वान रामायण में भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानते हैं।

  गौरतलब है कि आवास विकास कॉलोनी कूड़ाघाट के सतीश पार्क में श्री राम कथा का आयोजन दिनांक 16 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक होगा।किय आयोजन समिति के सदस्य सुधाकर द्विवेदी के ने बताया गया कि  श्री राम कथा अपराह्न 2.30 बजे से 6 बजे तक काशी से पधारे कथा व्यास श्री हेमन्त उपाध्याय जी महाराज द्वारा कथा का अमृत रस पान करा रहे हैं।आयोजन समिति के परमहंस उपाध्याय,लालचंद गुप्ता,श्यामबिहारी राय,रामदरश यादव,गुलाब चंद गुप्ता  कथा के कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं।

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