उत्तर प्रदेश में गुलदार/तेंदुए की संख्या की संख्या तीन गुना बढ़ी
लखनऊ, 04 दिसंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के राज्य सरकार के प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम दिखाने शुरू कर दिए हैं। स्थिति यह है कि बीते तीन वर्षों के अंदर प्रदेश में गुलदार/तेंदुए की संख्या की संख्या में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि गैंडों की संख्या में 35 फीसद वृद्धि दर्ज की गई है।
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2022 की गणना में दुधवा नेशनल पार्क में 65 हजार से अधिक और कतर्नियाघाट में लगभग 12 हजार वन्यजीव दर्ज किए गए थे। वहीं 2025 में इन आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। दुधवा में वन्यजीव संख्या बढ़कर 1.13 लाख से अधिक हो गई है, जबकि कतर्नियाघाट में 17 हजार और बफर जोन में लगभग 15 हजार वन्यजीव दर्ज हुए। विशेष रूप से गुलदार/तेंदुए की संख्या 92 से बढ़कर 275 और गैंडों की संख्या 49 से बढ़कर 66 हो जाना संरक्षण की बड़ी सफलता है।गुरुवार को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दुधवा, पीलीभीत, कतर्नियाघाट, अमानगढ़ और सोहगीबरवा जैसे प्रमुख वन क्षेत्रों में गैंडा, बाघ, बारहसिंघा और घड़ियाल जैसे दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इन वन क्षेत्रों को प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करना है, ताकि संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।
उन्होंने बताया कि इको-टूरिज्म विकास बोर्ड द्वारा पिछले तीन वर्षों में 161 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि व्यय कर मार्ग सुधार, कैफेटेरिया, बर्ड वॉचिंग स्थल, गजिबो, नेचर ट्रेल और बच्चों के लिए मनोरंजन क्षेत्रों जैसी पर्यावरण-संवेदनशील सुविधाएं तैयार की गई हैं। वर्ष 2022-23 में 21.04 करोड़, वर्ष 2023-24 में 68.56 करोड़ और वर्ष 2024-25 में 72.30 करोड़ रुपए की स्वीकृत परियोजनाएं इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने का प्रमाण हैं।
सिंह ने बताया कि इको-टूरिज्म को और बेहतर बनाने के लिए दुधवा, पीलीभीत और कतर्नियाघाट क्षेत्रों में नेचर गाइड्स को प्रशिक्षित किया गया है। थारू जनजाति को होम स्टे और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा रहा है।

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