घने कोहरे और ठंड पर आस्था भारी पड़ी, तीन करोड़ 56 लाख श्रद्धालुओ ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)  धर्म , आस्था और भारतीय संस्कृति के अद्वतीय दिव्य और भव्य संगम माघ मेला  के चौथे स्नान पर्व बसंत पंचमी के अवसर पर कुल तीन करोड़ श्रद्धालुओ ने आस्था कि डुबकी लगाई। मेला प्रशासन ने कुल तीन से साढ़े तीन करोड़ लोगों के स्नान करने की  संभावना जताया था।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वसंत पंचमी पर देश के कोने कोने से आए तीन करोड़ 56 लाख श्रद्धालुओ ने गंगा मे स्नान किया | घने कोहरे और ठंड पर  आस्था भारी पड़ी | श्रद्धालुओं ने वसंत पंचमी का स्नान देर रात से ही शुरू कर दिया था | मेला क्षेत्र मे संगम स्नान के लिए श्रद्धालुओ की कतार  शाम तक लगातार जारी रही है | उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजे तक लगभग एक करोड़ 40 लाख , 12 बजे तक दो करोड़ 90 लाख  और शाम चार बजे तक तीन करोड़ 20 लाख लोगों  ने आस्था कि डुबकी लगा चुके थे | माघ मेले के चौथे  वसंत पंचमी  स्नान पर कुल तीन करोड़ 56 लाख  श्रद्धालुओ ने आस्था की  लगाई डुबकी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संगम मे वसंत पंचमी पर स्नान करने वाले सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी | “उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा कि वसंत पंचमी के पवन अवसर पर आज तीर्थराज प्रयाग मे त्रिवेणी मे पुड़य स्नान का सौभाग्य प्राप्त कर रहे सभी श्रद्धालुओ को हार्दिक बधाई | पवन संगम मे आस्था कि डुबकी सभी के लिए शुभ-फलदाई हो , सभी कि मनोकामनाएं पूर्ण हो, माँ गंगा से प्रार्थना है।”

मेला अधिकारी ऋषिराज ने मीडिया से बातचीत मे बताया कि श्रद्धालुओ कि सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है | भीड़ पर अभी नियंत्रण बना हुआ है |  शाम चार बजे तक तीन करोड़ 20 लाख लोग आस्था कि डुबकी लगा चुके थे |  मेले मे श्रद्धालुओ का विशाल जनसमूह आस्था और भक्ति कि परकस्था को दर्शाता है, जहां श्रद्धालु ठंड के बावजूद भक्ति भाव से स्नान करने पहुचें हैं।

गुरुवार की रात के गहराने के साथ साथ सर्द हवा  संगम तीरे अपना दामन फैलाती गयी। शुक्रवार को वसंत पंचमी के दिन में सर्द तेज हवा मानो श्रद्धालुओं की आस्था की परीक्षा ले रही है| श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं ने हर हर गंगे के उद्घोष के साथ विभिन्न घाटों पर स्नान किया। संगम की रेती पर आस्था का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा है। संगम की विस्तीर्ण रेती पर खुले अम्बर के नीचे देर रात से होते ही श्रद्धालुओं का त्रिवेणी में डुबकी लगाने का क्रम शुरू हो गया। जैसे जैसे भगवान भास्कर का उदय हो रहा था मौसम सुहावना बनता जा रहा था। दोपहर चटख धूप में संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं कि भीड़ में कमी नहीं देखी गयी।

महाकुंभ के बाद पहले माघ मेले मे बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र समेत तमाम राज्यों से आस्थावानों ने त्रिवेणी मे स्नान किया |  मेले मे आसपास के ग्रामीण इलाके से आने वाले लोगों की संख्या अधिक है। कुंभ के आकर्षण ने माघ मेले मे भी विदेशी श्रद्धालुओ को स्नान करते देखा जा रहा है | भारी भीड़ को देखते हुए बाहर से आने वाले वाहनों को शहरी सीमा के बाहर फाफामऊ, नैनी, झूंसी और सुलेमसराय आदि इलाकों में बनी पार्किंग में ही रोका जा रहा है।

सुरक्षा की दृष्टि से मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे से अवांछनीय तत्वों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं , फायर वाच टावर में तैनात जवान भीड़ को नियंत्रित करने के साथ साथ अवांछनीय तत्वों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। मेला क्षेत्र को सात  जोन में बांटकर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, गोताखोर, तैनात किया गया है।

पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलनन्द सरस्वती सुबह सरस्वती संगम मे बड़ी संख्या मे सीसीओ और साधु संतों के साथ तक कार से आए | इसके बाद सीसी उनको व्हील चेयर पर बैठकर संगम तट ले गए| घंटा घड़ियाल कि गूंज और गंगा मैया के जैकारो के बीच उन्होंने  आस्था कि डुबकी लगाई | स्वामी नारेंद्रनंद सरस्वती , स्वामी अधोकक्षजनन्द महाराज, दंडी  सन्यासी, साधु संतों और किन्नर अखाड़े कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, सनातन किन्नर अखाड़ा कि आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी के नेतृत्व किन्नरों ने स्नान किया।

शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज ने बताया कि खुले आसमान के नीचे शिविर के बाहर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती के छह दिन से बैठने के कारण शुक्रवार को उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया है| उनको बुखार हो गया है| चिकित्सकों से परामर्श लिया गया है | फिलहाल वह आराम कर रहे हैं और लोगों से मुलाकात करने से बच रहे हैं| वसंत पंचमी पर स्वामी जी ने संगम स्नान नहीं किया।

मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज ने बताया कि शंकराचार्य ने पहले ही कह दिया था कि जब तक प्रशासन माफी नहीं माँगता और ससम्मान पालकी से नहीं ले जाया  जाएगा, वह संगम स्नान नहीं करेंगे| उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी के चलते बड़ी संख्या मे शिष्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती का दर्शन करने पहुचे थे | उनको जब पता चला कि शंकराचार्य अस्वास्थ्य हैं, वैनिटी वैन से बाहर नहीं आए  तब वैन के बाहर भीड़ लग गई | काफी समय के बाद वह शिविर के बाहर अपने आसन पर बैठकर श्रद्धालुओ को आशीर्वाद दिया।

गौरतलब है कि मौनी अमावस्य स्नान पर्व पर मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को रथ और बग्घी सहित जाने से रोक दिया था और उनके साथ दुर्व्यवहार और शिष्यो  के साथ  मार पीट किया | उन्हे उनके सिवीर के बाहर तक बिना स्नान कराए पुलिस छोड़ कर गई तभी से वह वही बैठे हैं।

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