माघ मेले में मोनालिसा की छोटी बहन के नाम से मशहूर महाराष्ट्र की तनिष्का

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) तीर्थराज प्रयाग मे  2025-महाकुंभ में जिस प्रकार मध्य प्रदेश के इंदोंर निवासी साधारण सी दिखने वाली मोनालिसा ने मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी थी उसी प्रकार 2026 के माघ मेले में महाराष्ट्र की तनिष्का खूब सुर्खियां बटोरती नजर आ रही हैं।

    मोनालिसा की हमशक्ल दिखने वाली  तनिष्का ने बताया कि मेले में लोग उसे मोनालिसा की छोटी बहन कहते हैं, जिसका वह खंडन करती है | उन्होंने बताया कि परिवार के गुजर बसर के लिए वह मेले मे रुद्राक्ष कि माला बेचने आई है लेकिन उसकी पहचान मोनालिसा की छोटी बहन के रूप मे लोगों ने बना दी है। मेले में भीड़ पूरे समय उसके इर्द गिर्द घूमती नजर आती है।

      तनिष्का ने बताया कि “उसने भी लोगों कि तरह दो पैसे कमाने के लिए मेले में रुद्राक्ष माला और रुद्राक्ष बेचने कि ललक से कदम रखा | उसका एक भाई, दो बहने , और माता -पिता है | उसके माता-पिता पहले से माल बेचने का काम करते हैं| वह पहली बार माघ मेले मे आई है | उसने बताया कि उसके पास 50 रुपए से लेकर 500 रुपये तक की  माला  है | उसने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण ही उसे 15 साल कि उम्र मे माला बेचने का काम करना पड़ रहा है | आर्थिक तंगी के कारण उसकी पढ़ाई छूट गई | उसकी इच्छा होती है कि मई भी पढलिख कर कुछ बनती तो अपने माता पिता का सहारा बनती |

    उसने बताया कि लोगों को रंग.बिरंगी चीजें आकर्षित करती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ लोग माला खरीदने के बजाय मेरा वीडियो बनाने लगे और माला बिकना बंद हो गया। लोग मेरे पहनावे और  मेकअप के कारण मुझे मोनालिसा की छोटी बहन बोलने लगे और मेरा वीडियो कब वायरल हो गया मुझे पता ही नहीं चला।“ लोग उसकी तस्वीर लेने कि मांग करने लगे और माल खरीदने की  कोई बात नहीं करता |

    तनिष्का भी मोनालिसा की तरह तीखे नैन नक्श, शोख, सादगी से भरपूर है| उसका पहनावा और मेकअप भले ही मोनालिसा की तरह सादगीपूर्ण है| वह रुद्राक्ष, उसकी माल, स्फटिक लेकर जिधर से गुजरती है उसके आस-पास कैमरों की  भीड़ लग जा रही है | लोग उसका इंटरव्यू ले रहे हैं जिससे उसके काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है |

      तनिष्का का कहना है प्रसिद्ध होना अच्छी बात है लेकिन प्रसिद्धी से घर का चूल्हा नहीं जलता | अत्यधिक भीड़ और ध्यान के कारण  उसे अपना काम करना मुश्किल हो रहा है | उसे तो घर चलाने के लिए मेले से कुछ आमदनी की इच्छा रहती है। जो काम करने आई थी भीड़ के कारण से नहीं कर पा रही है । लोग वीडियो तो बना रहे हैं लेकिन माला नहीं खरीद रहे। चारो तरफ से जब लोग भीड़ लगा लेते हैं तो माला खरीदने वाले लोग भी मेरे पास नहीं पहुंच पाते हैं। मेले में मुझे पहचान तो मिली लेकिन घर खर्च चलाने के लिए कोई काम नहीं है। प्रससिद्धि पाने से महत्वपूर्ण है परिवार कि रोजी रोटी के जुगाड़ के लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना, यही मेरे लिए किसी शोहरत से कम नहीं है |

      गौरतलब है कि मोनालिसा भी कुंभ मे परिवार के साथ रुद्राक्ष, स्फटिक और दूसरे माल बेचने आई थी| वह बंजारा समुदाय से थी| उसकी भूरी आँखे , सादगीपन और साँवली सूरत ने कुंभ मेले मे भरपूर पहचान बना दी | उसका भी आकर्षण इस कदर लोगों पर छाया कि रातों रात विडिओ वाइरल हुआ और वह सोशल मीडिया पर चा गई | भीड़ उसके इर्द गिर्द रहती , माल बेचने मे उसे दिक्कत होने लगी| मजबूरन उसे मेल छोड़ घर वापस जाना पड़ा | कुंभ के मेले से उसे इतनी प्रसिद्धि मिली कि फिल्मी दुनिया मे उसका नाम गूंजने लगा |

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