प्रयागराज माघ मेला में पेड़.पौधे से जीवन के जुड़ाव का संदेश दे रहे राम बाहुबली
राम बाहुबली दास महाराज का दावा है कि इस संकल्प को लेकर वह अब तक करीब एक लाख किमी साइकिल चला चुके हैं। पौधरोपण के जरिये प्रकृति को बचाने की इस मुहिम के तहत वह देश के लगभग सभी राज्यों का भ्रमण कर चुके हैं। मेले में वह पेड़.पौधों से जीवन के जुड़ाव का संदेश देकर श्रद्धालुओं को सिंदूर , कपूर और तेजपत्ता समेत अन्य औषधीय गुणों वाले पौधे भी बांट रहे हैं।" सादा जीवन, उच्च विचार और वसुधैव कुटुंबकम" के मार्ग को अपनाकर पौधरोपण के जरिये प्रकृति को बचाने की इस मुहिम को आगे बढ़ रहे हैं|
अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड के महेंद्रांचल पर्वत पर धूनी रमाने वाले बाहुबली दास महाराज की साइकिल यात्रा प्राकृतिक से परमात्मा की ओर नेपाल के लुंबिनी से यहाँ पहुंचे है। मूल रूप से सोनभद्र निवासी बाबा कई वर्षों तक अरुणाचल प्रदेश में आदिवासियों के बीच रहे। वहीं, साधना के दौरान पर्यावरण प्रेमी ज्ञान स्वरूप सदानंद (जीडी अग्रवाल) से प्रेरित होकर भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। गुरु बालक दास के आशीर्वाद से वह साइकिल से घूम.घूमकर लोगों को एक पौधा देकर उसे रोपने और बचाने का संकल्प दिलाते हैं। मेले में वह संगम लोअर मार्ग पर शास्त्री पुल के पास देवरहा बाबा न्याय मंच के शिविर में हैं।
एक दिन में पांच स्कूलों में जाने का लक्ष्य के साथ दास महाराज स्कूलों में पहुचते हैं। वहां छात्रों को एकत्रित कर पेड़.पौधों का जीवन में महत्व बताते हैं। उनका कहना है कि हम बाहर ऊर्जा खोजते हैं जो पेड़.पौधों के रूप में हमारे सामने हैं। स्कूल में बच्चों संग एक पौधा लगाकर सभी को 10.10 पौधे लगाने और बचाने की शपथ दिलाते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों मे तो आसानी से बच्चों से मुलाकात हो जाती है लेकिन प्राइवेट स्कूलों मे उन्हें वेश-भूषा (साधारण संतों वाले पहनावे) को लेकर अनुमति नहीं मिलती |
बाहुबली दास महाराज ने एक सवाल के जवाब मे बताया कि उनके पास आर्थिक स्रोत नहीं है| जो श्रद्धालु सत्संग और यात्रा के दौरान जो रकम दान में मिलती है, उससे वह औषधीय गुणों वाले पौधे खरीदकर बांटते हैं। कभी ये पौधे नहीं मिलते तो नीम , पीपल , आम , बरगद , बेल आदि के पौधे रोपते हैं। बाबा बताते हैं कि मुख्य स्नान पर्वों पर तेजपत्ता, सिंदूर और कपूर के पौधे श्रद्धालुओं को वितरित करेंगे। इसके लिए करीब 10 ,000 पौधे मंगाए हैं, जो पौधे वह बांटेंगे ।
उन्होंने ने बताया कि वह जंगलों कि अंधाधुंध कटाई से दुखी है | पेड़ पौधों मे भी इशवेर का वास होता है | ये हमे आक्सिजन देते है | वनों के दोहन से समाज और राष्ट्र दोनों के लिए बेहद हानिकारक है क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान, मृदा अपरदन, जल चक्र में बाधा, और आदिवासियों व स्थानीय समुदायों की आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर खतरा बढ़ता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी सामाजिक समस्याएँ पैदा होती हैं, जो अंततः राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती हैं।
बाबा ने बताया कि विज्ञान की उन्नति ने जिंदगी का मकसद और शैली बदल दी है। इसी के साथ लोगों में संसाधनों को इकट्ठा करने और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की आदत हवस में बदल गई है। विज्ञान की उन्नति ने जिंदगी का मकसद और शैली बदल दी है। इसी के साथ लोगों में संसाधनों को इकट्ठा करने और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की आदत हवस में बदल गई है।
स्वामी जी बताया कि वनों का दोहन समाज और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद हानिकारक है, क्योंकि यह जैव विविधता का नुकसान, मिट्टी का कटाव, जल चक्र में गड़बड़ी, जलवायु परिवर्तन (कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि), बाढ़ का खतरा, और वनाग्नि जैसी समस्याएं पैदा करता है|

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