अविमुक्तेश्वरानंद ही हैं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य उनके अधिवक्ता ने किया दावा

प्रयागराज, ( दिनेश तिवारी) मेला प्राधिकरण की ओर से शंकराचार्य का साक्ष्य देने के लिए जारी नोटिस के जवाब में मंगलवार को शंकराचार्य के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य हैं इसको लेकर कोई विवाद नहीं है। उनके नाम से रजिस्टर्ड वसीयत है, जो यह उच्चतम न्यायालय के रिकॉर्ड में दर्ज है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता डॉ पी एन मिश्रा ने त्रिवेणी रोड पर सिवीर के बाहर  प्रेसवार्ता में दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही ज्योतिष मठ के शंकराचार्य हैं। उनके नाम से रजिस्टर्ड वसीयत है। इसमें कोई विवाद नहीं है। मेला प्रशासन की ओर से शंकराचार्य को लेकर पूछे गए सवाल पर आज उन्होंने सफाई दी।

डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय मे जो भी दस्तावेज जमा किए गया है उसपर भी “शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद” करके ही संबोधित किया गया है | उन्होंने बताया कि नोटिस मे 14 अक्टूबर 2022 का उच्चतम न्यायालय का आदेश है कि जिसमें कहा गया कि आप को या किसी अन्य को  17 अक्टूबर 2022 के दिन या उसके बाद पट्टाभिषेक करवाने या करने से रोक दिया गया है | ऐसी स्थिति मे आप अपने को शंकराचार्य कैसे लिखते हैं| उन्होंने बताया कि प्रशासन ने इस मामले को देखा होगा या किसी ने बताया होगा और उन्होंने इसे उच्चतम कि वेबसाइट से निकाला होगा |

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि वह न तो धरने पर बैठे हैं न ही अन्न जल का त्याग किया है। उनको मेला प्रशासन ने हिरासत में लिया था। उनको लाकर जहां छोड़ा था वहीं पर हैं। चूंकि वह स्नान करने के निमित्त शिविर से निकले थे और अब ससम्मान स्नान करके ही शिविर में लौटेंगे चाहे जितना समय लग जाएं।

उन्होंने बताया कि मेला प्रशासन ने कानूनगो अनिल कुमार को रात 12 बजे ( सोमवार और मंगलवार की ) मध्य रात सिवीर पहुंच कर वहां पर मौजूद शिष्यो  से नोटिस लेने को कहा, उन्होंने नोटिस लेने से इनकार कर दिया, कहा इतनी रात मे कोई नहीं है, सुबह आइएगा | कानूनगो अनिल कुमार मंगलवार सुबह फिर शंकराचार्य शिविर पहुंचे| वहाँ गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया |

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने  बताया कि नोटिस मे लिखा था कि माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर मे लगे बोर्ड पर खुद को “ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य” लिखा है | इस तरह से उच्चतम न्यायालय के आदेश कि अवहेलना हुई है| खुद को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं, 24 घंटे के भीतर बताए|”

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद  माघ मेला प्रशासन पर पलटवार करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के कंधे पर बंदूक रखकर जो गलती प्रशासन से हुई है , उसको ये लोग पीछे करना चाह रहे हैं| उच्चतम न्यायालय का गलत  हवाला  देकर  ये लोग कब तक बच पाएगे| उन्होंने एक पत्रिका दिखते हुए कहा, “खुद सरकार ने महाकुंभ मे एक पत्रिका छापी थी, उसमें मुझे शंकराचार्य के रूप मे छपा था |’’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है “ मै हूँ ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य | इससे पहले, सोमवार को प्रेस कोन्फ़्रेंस  के दौरान उन्होंने कहा ,” शंकराचार्य वो होता है जिसे बाकी तीन पीठ शंकराचार्य कहते हैं| दो पीठ हमे शंकराचार्य कहते हैं | पिछले माघ मेले मे हमको साथ लेकर स्नान कर चुके हैं |

एक सवाल के जवाब मे उन्होंने कहा कि “वह न तो धरने पर बैठे है और नहीं अन्न जल का त्याग किया है, बस प्रशासन ने उनको जहां छोड़ा है वहीं शिविर के बाहर बैठे हैं |”

एक अन्य सवाल के जवाब मे उन्होंने ने बताया कि मेला  प्राधिकरण के अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के कंधे पर रखकर जो बंदूक चलाया है, उसके खिलाफ न्यायालय मे मामला दाखिल किया जाएगा |

उन्होंने युवाओ को एक संदेश दिया कि जवानी रक्षा करने के लिए मिलती है क्योंकि बूढ़ा और बालक रक्षा नहीं कर सकता | इसलिए नवजवान रक्षा कर सकता है इसलिए गौ माता की रक्षा के लिए अपनी जवानी का सदुपयोग करो | हमे गौ मत कि रक्षा करने के लिए हमे निकलना है और उनको बोटी बोटी काटने वालों को धक्का मारकर पीछे करना है और सही लोगों को सामने लाना है |

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