रुद्राक्ष वाले बाबा का माघ मेला मे धरना

प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) प्रयागराज माघ मेला और कुंभ मेले के प्रमुख आकर्षण माने जाने वाले शिव योगी अभय चैतन्य ब्रह्मचारी मौनी महराज “रुद्राक्ष वाले बाबा“  को उचित स्थान पर भूमि आवंटन नहीं होने के कारण मेला प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगते हुए संगम लोअर मार्ग पर जून अखाड़े के रोहितानन्द सरस्वती  संत के शिविर मे धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है |

मौनी महराज ने बताया कि वे 1984 से निरंतर माघ मेले और कुंभ मे संगम आकर शिविर लगाकर अनुस्थान कर रहे हैं| कड़ाके कि ठंड मे भी वे शिविर से संगम तट तक चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा (लेटकर) करते हैं | उन्होंने बताया कि इस बार भी वे विशेष अनुष्ठान और यज्ञ करने आए हैं लेकिन उन्हे प्रशासन ने  उचित स्थान पर भूमि आवंटन नहीं किया है जिसकरण उनका अभी तक शिविर नहीं लग पाया है | शनिवार को माघ मेले का पौष पूर्णिमा का पहला स्नान पर्व है और उन्हे काशी-मथुरा मंदिर निर्माण हेतु 1644वीं चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा पूरी करनी थी |

उन्होंने बताया कि पहले उनके अनुष्ठान राम जन्मभूमि मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण कि सफलता के लिए होते थे | अब वे काशी और मथुरा के लिए संकल्पित अनुष्ठान कर रहे हैं | उनका आरोप है कि 16 नवंबर  को मेला प्राधिकरण को शिविर की जमीन और सुविधाओं के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उन्हे अभी तक उपयुक्त स्थान आवंटित नहीं किया गया| जो  जमीन दी गई है  वह शिविर लगने  योग्य नहीं है और संगम से बहुत दूर है जिस कारण लेटकर परिक्रमा करना बड़ा ही दुरूह है |

मौनी महराज ने बताया कि 31 दिसम्बर को जब वे मेल क्षेत्र पहुचे और मेलाधिकारी से का प्रयास किया  तो कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस बल तैनात कर दिया गया| उन्हे मेलाधिकारी से मिलने नहीं दिया गया | उन्होंने इस स्थिति को अपमानजनक बताते हुए धरना शुरू करने को अपनी मजबूरी बताया |

मौनी महराज ने बताया कि इस वर्ष माघ मेले मे पाँच करोड़ 51 लाख रुद्राक्ष का शिवलिंग निर्माण करने का संकल्प लिया था | इसके साथ ही 12 करोड़ 51 लाख महामंत्रों के जप कि पूर्णाहुति के बाद आतंकवाद विनाश हेतु 101 कुंतल कि हवन और 11 कुंतल का प्रसाद का उनका संकल्प था, 11 हजार त्रिशूलों कि स्थापना करना था|

इसके अलावा काशी-मथुरा मंदिर निर्माण हेतु 1644वीं चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा भी होनी थी | उन्होंने चेतावनी दी कि यदि teen जनवरी पौष पूर्णिमा तक मेला प्रशासन से कोई समाधान नहीं मिल, तो वे मेला  छोड़कर दिल्ली जाएंगे | वहाँ वे प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर संत समाज के साथ आमरण अनशन करेंगे|

टिप्पणियाँ