भारतीय लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष, विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत : मोदी
नयी दिल्ली 15 जनवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विविधता को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा है कि भारत ने यह साबित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं लोकतंत्र को स्थिरता, गति और व्यापक स्तर प्रदान करती हैं और इसी का परिणाम है कि देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं तथा भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है क्योंकि लोकतंत्र की नींव मजबूत है। भारतीय लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष की तरह है, जिसे गहरी जड़ें सहारा देती हैं।
श्री मोदी ने गुरुवार को यहां राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों तथा पीठासीन अधिकारियों के 28 वें सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सम्मेलन के मुख्य विषय 'संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी परिणति' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत आजाद हुआ तो उस दौर में यह आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता में, भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा लेकिन भारत ने इसी विविधता को लोकतंत्र की ताकत बना दिया।
उन्होंने कहा कि एक बड़ी आशंका यह भी थी कि भारत किसी भी हालत में विकास नहीं कर पाएगा लेकिन भारत ने साबित किया कि लाेकतांत्रिक संस्थान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही लोकतंत्र की स्थिरता , गति और पैमाना तीनों आते हैं। भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्था बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा," हम लोक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव के काम कर रहे हैं। और इसी लोक कल्याण की भावना के कारण बीते कुछ वर्षों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत में लोकतंत्र सार्थक परिणाम देता है। "
उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र से इसलिए परिणाम मिलता है क्योंकि सरकार के लिए देश की जनता ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, " हमने जनता की आकांक्षाओं को, जनता-जनार्दन के सपनों को प्राथमिकता बनाया है। उसके रास्ते में कोई बाधा ना आए, इसके लिए प्रक्रिया से लेकर प्रौद्योगिकी तक, हर चीज का लोकतांत्रिकरण किया है और यह लोकतांत्रिक भावना हमारी रगों में, हमारे मन में है, हमारे संस्कार में है। " इस संदर्भ में उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चुनौतियों के बीच भारत द्वारा डेढ़ सौ से ज्यादा देशों को दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, " लोगों का हित, लोगों की भलाई और उनका कल्याण, ये हमारा संस्कार है, और ये संस्कार हमें हमारे लोकतंत्र ने दिए हैं।"
प्रधानमंत्री ने देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में महिलाएं केवल भागीदार ही नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका में हैं। उन्होंने कहा कि यह सशक्तिकरण आप को शीर्ष पद राष्ट्रपति से लेकर गांवों में निम्न स्तर तक दिखाई देगा।
श्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं। विभिन्न भाषाओं में नौ सौ से अधिक टेलीविजन चैनल हैं। हजारों समाचार पत्र और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। बहुत कम समाज इतने बड़े स्तर पर विविधता का प्रबंधन कर पाते हैं।
भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है क्योंकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत है। हमारा लोकतंत्र एक विशाल वृक्ष की तरह है, जिसे गहरी जड़ें सहारा देती हैं।
उन्होंने कहा कि यहां वाद-विवाद, संवाद और सामूहिक निर्णय-निर्माण की एक लंबी परंपरा रही है। भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। हमारे पवित्र ग्रंथ वेद पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। उनमें ऐसी सभाओं का उल्लेख है, जहां लोग मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकत्र होते थे। विचार-विमर्श और सहमति के बाद निर्णय लिए जाते थे। उन्होंने कहा, " हम भगवान बुद्ध की भूमि हैं। बौद्ध संघ में खुले और सुव्यवस्थित विचार-विमर्श होते थे। निर्णय सहमति या मतदान के माध्यम से लिए जाते थे।"
श्री मोदी ने कहा कि दुनिया अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुज़र रही है और ऐसे में विकासशील देशों के लिए भी यह नए रास्ते बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने और विकासशील देशों को विकास की यात्रा में साथ लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा , " राष्ट्रमंडल देशों की कुल जनसंख्या का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में बसता है। हमारा प्रयास रहा है कि भारत सभी देशों के विकास में ज्यादा से ज्यादा योगदान दे। सतत विकास के लक्ष्यों सहित भारत स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास, और नवाचार के क्षेत्र में, हम पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि भारत प्रत्येक वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने कहा," अपनी जी 20 अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा है। भारत का ये लगातार प्रयास है कि हम जो भी नवाचार करें, उससे पूरे ग्लोबल साउथ को लाभ हो, कॉमनवेल्थ देशों को फायदा हो। हम ओपन सोर्स टेक प्लेटफॉर्म भी बना रहे हैं, ताकि ग्लोबल साउथ के हमारे साथी देश भी अपने यहां भारत जैसी व्यवस्थाएं विकसित कर सकें।" श्री मोदी ने कहा कि इस सम्मेलन का एक प्रमुख लक्ष्य यह भी है कि कैसे हम अलग-अलग तरीकों से संसदीय लोकतंत्र के ज्ञान और समझ को बढावा दें। इसमें संसदीय अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों दोनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ये काम लोगों को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़ी भूमिका से जोड़ने का काम है। उन्होंने कहा, " भारत की संसद पहले से ही, ऐसे काम को कर रही है। अध्ययन यात्रा, निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम और और इंटर्नशिप के माध्यम से जनता को, संसद को और करीब से जानने का मौका मिला है। हमने अपनी संसद में एआई की मदद से बहस और कार्यवाही को उसी समय क्षेत्रीय भाषा में अनुदित करने का काम शुरू किया है। इससे युवा पीढी को भी संसद को समझने का बेहतर अवसर मिल रहा है।"
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