भारत बना अंतरराष्ट्रीय आईडीईए का अध्यक्ष, विश्व के सबसे बड़े और पारदर्शी लोकतंत्र के तौर पर बढ़ी प्रतिष्ठा
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (वार्ता) विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के समूह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (अंतरराष्ट्रीय आईडीईए) द्वारा भारत के अध्यक्ष चुने के बाद विश्व के सबसे बड़े पारदर्शी लोकतंत्र के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा में इजाफा हुआ है।
चुनाव आयोग ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच राष्ट्रीय राजधानी राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र और चुनावी प्रबंधन से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय महासंगम आयोजित किया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विश्व के लगभग 70 लोकतांत्रिक देशों ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल भागीदारी के लिहाज से एक नया कीर्तिमान बना, बल्कि इसके माध्यम से दुनिया ने भारत की लोकतांत्रिक विरासत, चुनावी प्रक्रियाओं की मजबूती, व्यापकता और पारदर्शिता को करीब से देखा, समझा और सराहा है।
सम्मेलन के समापन पर भारत के नेतृत्व में सभी सहभागी देशों ने 'दिल्ली डिक्लेरेशन 2026' को अपनाया। यह घोषणा पत्र लोकतंत्र को मजबूत करने, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और चुनावी प्रबंधन में पारदर्शिता एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैश्विक दस्तावेज माना जा रहा है।
चुनाव आयोग द्वारा स्थापित भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) भी तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है। आज आईआईआईडीईएम लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े और प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में से एक के रूप में उभर रहा है, जहां विभिन्न देशों के चुनाव अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची किसी भी सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला होती है। इसी दिशा में निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में ईसीआईनेट लॉन्च किया गया, जिसने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। अनेक देशों ने इस आधुनिक और तकनीक-आधारित प्रणाली को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं दक्षता और बढ़ेगी। इस अवसर पर स्पष्ट किया गया कि लोकतंत्र की असली शक्ति मतदाता है।

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