पूंजीपति चला रहे हैं सरकार, किसानों को जमीन बेचने के लिए किया जा रहा बाध्य: राकेश टिकैत
माघ मेले में आयोजित किसान महापंचायत में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि देश की सरकार व्यापारी चला रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। किसानों के हित में ऐसा कानून बनाया जाए जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे कोई भी व्यापारी अनाज न खरीद सके। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। खेती हमेशा से फायदे का सौदा रहा है। सरकार किसानों की जमीन को हड़पना चाहती है। कलम और कैमरे पर बंदूक का पहरा लगा है।
श्री टिकैत ने कहा कि माघ मेले में हर वर्ष किसान पहुंचते हैं और स्नान करने के बाद पंचायत में रणनीति तय करते हैं। पंचायत में छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि सहित कई राज्यों से लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह साबित करने में लगी हुई है कि खेती-किसानी से नुकसान हो रहा है। इसलिए वह खेतों को बेचने के लिए दबाव बना रही है। फसल इतनी सस्ती कर दी गई है कि किसान यह मान लें कि खेती से कोई लाभ नहीं है और वह जमीन को बेच दें।
किसान नेता ने कहा कि खेती किसानी कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है। सरकार की एक तरह से साजिश कर कुचक्र रच रही है। सरकार चाहती है कि अगर अनाज का मूल्य सही नहीं मिलेगा और किसानों की लागत नहीं निकलेगी वह खेती को घाटे का सौदा समझेंगे और जमीन को बेच देंगे। सरकार की पॉलिसी को समझने की जरूरत है। किसान यूनियन को कमजोर करने के लिए कई संगठन बना दिए गए हैं। सरकार की हमेशा से नीति रही है “फूट डालो और राज करो।“
उन्होंने कहा कि किसान यूनियन को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। सरकार व्यापारी चला रहे हैं जो दिखते नहीं हैं। देश को पहले हिंदू मुसलमान में बांटा अब किसानों को आपस में लड़ाकर उनकी लड़ाई का फायदा उठा कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा सके।
राकेश टिकैत ने कहा कि माघ मेले में आयोजित किसान महापंचायत में आने वाले किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ से आए किसानों को अलोपीबाग चुंगी से 200 मीटर दूर कार्यक्रम में आने के लिए नौ किलोमीटर घुमा दिया गया। मेले में भीड़ दिखाने के लिए किसानों और श्रद्धालुओं को इधर.उधर घुमाया जा रहा है|

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें