माघ मेल” केवल एक पर्व नहीं , यह सनातन साधना, तीर्थ.परंपरा, और आध्यात्मिक जागरण का उत्सव है: अविमुक्तेश्वरानंद
माघ मेले मे त्रिवेणी मार्ग- सेक्टर.4 स्थित शंकराचार्य शिविर में मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संत.समाज एवं उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मेले की आध्यात्मिक परंपरा ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक धरोहर पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि “माघ मेल” केवल एक पर्व नहीं है, यह सनातन साधना, तीर्थ.परंपरा, संत.समागम और आध्यात्मिक जागरण का उत्सव है। यहाँ आने वाला प्रत्येक साधक तीर्थराज प्रयाग के दिव्य संगम से जीवन में पुण्य और प्रेरणा प्राप्त करता है।
शंकराचार्य ने कहा कि वे माघ मेला अवधि में उपस्थित सभी प्रमुख संतों से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और समस्त आश्रमों व शिविरों में जाकर संवाद करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ.संरक्षण एवं गौ.सेवा राष्ट्र और धर्म के लिए अत्यंत अनिवार्य विषय हैं और समाज , सरकार तथा धर्माचार्यों के संयुक्त प्रयास से ही इस दिशा में प्रभावी कार्य संभव है।
उन्होंने कहा कि माघ मेला में संत.समाज से मिलकर गौ माता के संरक्षण व संवर्धन हेतु समर्थन माँगूँगा तथा इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास करूंगा।
शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित संत , विद्वान एवं संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे जिसमें प्रमुख रूप से स्वामी अमृशाननाद , सहजानंद ब्रह्मचारी , तीर्थानंद ब्रह्मचारी , देवेंद्र पांडे गोप जी, पंकज पांडेय, राम सजीवन शुक्ला, और भारत दास समेत तमाम लोग उपस्थित रहे।

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