पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को संगम तट पर जाने से रोका

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)  तीर्थराज प्रयाग के माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान के मौके पर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को संगम स्नान करने जाने से रोक दिया जिसके विरोध मे वह सिविर के पास सड़क पर धरणे पर बैठ गए है।

     जगद्गुरु शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया। प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेल क्षेत्र से उनके सिविर पर पहुच दिया, जहा पर वह सड़क पर ही धरने पर बैठे हैं।

   उन्होंने बताया कि सबसे पहले पुलिस ने रथ पर सवार होकर समर्थकों के साथ तट पर जाने से रोका । शंकराचार्य ने इस बात को मान लिया । इसी दौरान पीछे से पुलिस वालों ने कुछ गड़बड़ी कि जिससे समर्थकों और उनके बीच तीखी बहस शुरू हो गई जो देखते ही देखते धक्का मुक्की मे बदल गई । पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से समर्थकों को धक्का देकर पीछे हटाया। इस कार्रवाई से संतों में भारी रोष व्याप्त हो गया।

        पुलिस का तर्क था कि मेला क्षेत्र को 'नो-व्हीकल जोन' घोषित किया गया है। इस कारण किसी भी बड़े काफिले या वाहन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।  पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद को रथ से नीचे नहीं उतरने दिया और कहा कि जुलूस के साथ संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने पुलिस और मेला प्रशासन पर मनमानी और तानाशाही करने का आरोप लगाया।

    पुलिस ने भीड़ को देखते शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा था, लेकिन समर्थक इसके लिए तैयार नहीं हुए । इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति जाहिर की और पुलिस प्रशासन के रवैये को मनमाना बताया। घटना के बाद देखते ही देखते पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। 

       पुलिस से झड़प की सूचना वायरलेस पर प्रसारित होने के बाद बड़ी संख्या में अधिकारी फोर्स के साथ संगम तट पर पहुंच गई । मेल क्षेत्र मे मौजूद सभी आला अधिकारी मौके पर पहुंचे।

        प्रयागराज पुलिस कमिशनर जोगिदर सिंह ने बताया कि शंकराचार्य अपनी पालकीए रथ और 200 समर्थकों के साथ आए  बेरीअर तोड़ा  अपने रथ  और पालकी समेत उस समय संगम पर जाने के लिए जिद करने लगे जब संगम नोज पर उस समय बहुत भीड़ थी  श्रद्धालु महिलाये और बच्चे थे उस समय मेले का पीक चल रहा था   उन्होंने  बताया कि जब उनको आगे बढ़ने से रोक गया तो वह वापसी मार्ग पर जाकर रुक गए  शंकराचार्य के कारण करीब तीन घंटे तक अव्यवस्था बनी रही।

      उन्होंने बताया कि स्वामी जी से बारबार आग्रह किया जा रहा था द्य मौनी अमावस्या पर रथ या पालकी से जाने कि कोई परंपरा नहीं है द्य आज किसी वीआईपी स्नान पर पूर्ण प्रतिबंध था द्य आग्रह करने के बावजूद स्वामी जी अपनी जिद पर आड़े रहेद्य अपने समर्थकोंए पालकीए रथ और अपने 200 समर्थकों के साथ संगम स्नान करने कि जिद कर रहे थे।

      उन्होंने बताया कि उनका इतना ही कहना है कि कल्पवसी संत और जो साधु हैं  उनके प्रति हमारी पूर्ण संवेदना है और पूर्ण श्रद्धा रखते हैं उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने 200 लोगों के साथ आकर बेरीअर तोड़ा उसको लेकर विचार किया जाएग।

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