प्रदेश भर की पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनी बरेली की भरतौल ग्राम पंचायत, ओएसआर मॉडल से रचा इतिहास

लखनऊ 28 जनवरी (वार्ता) स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश में बरेली की मॉडल बनी ग्राम पंचायत भरतौल ने स्वच्छता, नवाचार और जनभागीदारी के जरिए आत्मनिर्भर पंचायत का उदाहरण प्रस्तुत किया है। कचरा प्रबंधन, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन और संसाधन सृजन के माध्यम से भरतौल ने न सिर्फ अपने गांव को स्वच्छ बनाया, बल्कि स्थानीय आय के स्रोत विकसित कर प्रदेश भर की पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट केंद्र और रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) स्थापित कर जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है, जिसे ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाता है। अब तक वर्मी कम्पोस्ट बिक्री से 55 हजार रुपये तथा डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से 65 हजार रुपये की आय हुई है। इसके अलावा पंचायत के ओएसआर खाते में कुल 3.25 लाख रुपये मौजूद हैं, जिनका उपयोग भविष्य के आयवर्धक विकास कार्यों में किया जा रहा है।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि भरतौल जैसी मॉडल ग्राम पंचायतें उत्तर प्रदेश सरकार के गांवों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प की सशक्त मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सफल मॉडलों को प्रदेश की अन्य पंचायतों में भी लागू किया जाएगा।
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पंचायत गेस्ट हाउस निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जिससे बाहरी आगंतुकों को आवास सुविधा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के चलते भरतौल ग्राम पंचायत कार्बन न्यूट्रल पुरस्कार की पात्रता भी हासिल कर चुकी है।
निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि भरतौल ने यह सिद्ध कर दिया है कि नवाचार और जनभागीदारी से पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकती हैं। ओएसआर आधारित यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

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