शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान
शैव संप्रदाय के श्री पंचदशनाम जून अखाडा के जगतगुरु सूर्याचार्य कृष्णदेवानंद गिरि महाराज ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान है | शंकराचार्य का पद सनातन धर्म मे सर्वोच्च होता है | वे धर्म के संरक्षक, हिन्दू दर्शन (अद्वेत वेदांत) के मार्गदर्शक और सामाजिक-नैतिक मुद्दों पर सनातन परंपरा के प्रतिनिधि के रूप मे कार्य करते हैं, जो धार्मिक एकता व आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देते हैं और दक्षणामी संप्रदाय के प्रमुख होते हैं |
जगतगुरु सूर्याचार्य ने कहा कि इन्हे सनातन धर्म का सबसे बड़ा धर्मगुरु और बौद्धिक रीढ़ मन जाता है, जो आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते है| ये आदि शंकराचार्य की विरासत के वाहक है,पवित्र ग्रंथों को व्याख्या करते हैं और हिन्दू धर्म कि दार्शनिक नीव को मजबूत करते हैं| उन्होंने कहा कि वह किसी कि बुराई नहीं करते लेकिन शंकराचार्य पद की गरिमा को कलंकित किया गया जो सर्वदा अनुचित है | उन्होंने कहा कि संत के लिए धर्म से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता | साधु-सन्यासी के लिए धर्म और रस्त्र सर्वोपरि होता है | धर्म ही उनकी प्रॉपर्टी होती है और रस्त्र ही उसका स्वाभिमान होता है| धर्म के खिलाफ आचरण करने वाला सनातन का प्रतिनिधि नहीं हो सकता |
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार से संत समाज के साथ पूरे देश के श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी आघात पहुंचा है। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान की घटना की कठोरतम निंदा भी की है। उन्होने कहा कि संत और महात्माओं तथा शंकराचार्य जैसे सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक की भी गरिमा सुरक्षित नहीं है| शिखा सूत्र और स्वयमेव इस कलयुग में शिव के अंश स्वामी शंकराचार्य ज महाभाग का अपमान करने का साहस हुआ |
जगतगुरु सूर्याचार्य ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान निंदनीय कृत्य है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, वहां धर्म गुरु का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा| शंकराचार्य को स्नान करने से रोका गया, बटुक ब्राह्मणों की शिखा खींची गई ,घोर अपमान किया| जगतगुरु शंकराचार्य का अपमान नहीं यह हिंदू धर्म का अपमान है|

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