शंकराचार्य भारी मन से माघ मेला छोड़ काशी के लिए रवाना

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) ज्योतिष्पीठ (बद्रिकाश्रम) शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने  माघ मेला क्षेत्र से काशी के लिए विदा लेते हुए कहा , आज मन बहुत व्यथित है की हम बिना स्नान किए ही लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक हैं । यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, संत समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है।

     स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर छोड़ने से पहले  संवाददाताओं से कहा कि अब सिर्फ बयान नहीं, अब मैदान में उतरने का समय आ गया है। इस बार उनके जीवन का सबसे बड़ा दुःख यह रहा कि वह मां गंगा में स्नान नहीं कर पाए।

     उन्होंने कहा, इस घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। इससे न्याय और मानवता से उनका विस्वास कमजोर हुआ है। मैन कुछ समय मौन रखकर  प्रार्थना भी की कि जिन लोगो ने मेरा अपमान किया है, उन्हें दंड मिले।  मेरे सम्मान को ठेस पहुचाने का प्रयास हुआ, इसके पीछे राज्य सरकार जिम्मेदार है। यह केवल स्थानीय प्रशासन करता तो बात अलग होती, लेकिन इसके पीछे सत्तारूढ सरकार  है।

   उन्होंने कहा कि जो मुगलों के समय हुआ ,वही आज हो रहा है।

एक तरफ गृह मंत्री का बयान आया कि संतो का अपमान बर्दाश्त नही किया जाएगा। वहीं माघ मेले में संतो को उनकी चोटी और शिखा पकड़ कर खींचा और पिता गया।  आज यहां जो अपमान हुआ ,ये सरकार का दोहरा चरित्र  उजागर करता है।

       उन्होंने कहा कि इस दुख की भरपाई कौन  सा नेता आएगा, कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई ,जिसकी कबि उम्मीद नही किया था। 

       स्वामी अविमुक्तेस्वरानंद ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि पालकी के माध्यम और पूरी सुरक्षा के साथ, फूलों की वर्षा करते हुए संगम स्नान कराया जाएगा। हमने उनके आश्वासन पर विश्वास किया लेकिन बाद में वही प्रशासन अपने वादे से मुकर गया।

        उन्होंने कहा कि हम आसमान और धरती को हिलाने की कीमत नहीं लेंगे, लेकिन अपने धर्म और सम्मान से कोई समझौता भी नहीं करेंगे। उन्होंने मंच से चेतावनी देते हुए कहा कि अब हिन्दू समाज को ठगा नहीं जा सकता। अब रणनीति बनेगी , अब आंदोलन होगा और सत्ता को उखाड़ने की तैयारी की जाएगी।

       शंकराचार्य ने  बताया कि उन्होंने पहले भी कहा था इस अन्याय के प्रतिकार के लिए  आगे भी आंदोलन किया जाएगा , अगर सनातनी चाहेंगे तो हम शांत नही बैठेंगे। मेरी युवाओं से अपील है की जिन्होंने सनातनी प्रतीकों का अपमान किया है , उन्हें उनकी औकात दिखानी होगी।

     गौरतलब है कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर प्रशासन द्वाराकथित दुर्व्यवहार कर स्नान नही करने दिया गया और उन्हें शिविर के बाहर छोड़ दिया गया जहाँ शिविर छोड़ने तक बाहर ही रहे।  अभी दो स्नान  एक फरवरी माघी पूर्णिमा और   15 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान शेष है । अब वे शेष दोनों स्नान भी नही करेंगे।

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