स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले से हमेशा के लिए बैन करने की प्रशासन की धमकी का नोटिस
नोटिस में कहा गया है कि आप मौनी अमावस्य के दिन बिना अनुमति के बगही के साथ संगम की तरफ जा रहे थे। उस समय संगम पर भीड़ थी। इससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया था। इसके अलावा अपातकाल के लिए रिज़र्व पांटून पुल पर लगे बैरिकेडिंग को तोड़ा। आप के कृत्य से व्यवस्था छिन्न भिन्न हुई। अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नही मिलाए तो संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं।
इससे पहले मेला प्रशासन ने मंगलवार 8 बजे कानून गो अनिल कुमार से शंकराचार्य के गेट पर पहला नोटिस चस्पा करवाया था। इसमें उच्चतम न्यायालय के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि उन्होंने शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया। 12 घंटे बाद मंगलवार रात 10 बजे 8 पन्ने का जवाब मेला प्रशासन को भिजवाया। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वह मानहानि का केस करेंगे।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने कहा,”सरकार अब बदले कि भवन से कारवाई कर रही है | उन्होंने बताया कि बुधवार कि दो बजे पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से नोटिस चस्पा कर दिया| उन्होंने बताया कि नोटिस देखा तो उसपर 18 जनवरी कि तारीख अंकित थी | शंकराचार्य ने बुधवार कि रात 8 बजे तीन पन्ने मे दूसरे नोटिस का जवाब मेला कार्यालय को भेजवाया गया |
उन्होंने मेला प्रशासन के आरोपो का खंडन करते हुए जवाब दिया कि संबंधित थाने का पुलिस अधिकारी उनको लेकर चल रहा था। उन्होंने ही पुलिसकर्मियों से बात करके बैरिकेडिंग हटाया था। लेकिन 5-6 पुलिस अधिकारियों ने माहौल बिगाड़ कर शंकराचार्य पर झूठा आरोप लगाया है।
उन्होंने लिखा है आश्रम में या शिविर में कोई बगही नही है। आपका (मेल प्रशासन) आरोप सर्वदा निराधार, मनगढ़ंत , बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और कपटपूर्ण किया गया मिथ्या आरोप है जो मेला क्षेत्र में सी सी टी वी फुटेज से स्पष्ट है।

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