शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी, समर्थन में पहुंचे इविवि के छात्र

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) ज्योतिष्पीठ (बद्रिकाश्रम) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन मे रविवार को  पूर्वांचल का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के बड़ी संख्या में छात्र शंकराचार्य के समर्थन में पहुंचे और नारेबाजी की। छात्रों का कहम था  कि शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान है।

गौरतलब है कि मौनीअमावस्या स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच स्नान को लेकर विवाद हो गया| प्रशासन ने उनको उनके त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर लाकर छोड़ दिया जिसके बाद से वह वहीं बैठे हैं| आज उनका  धरने का आठवां दिन है। बड़ी संख्या में साधु-संत और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग उनका दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं|

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर शनिवार शाम कुछ अज्ञात लोगों ने आपत्तिजनक नारे लगाए। शिविर के प्रभारी पंकज पांडेय वे थाना कल्पवासी मेला क्षेत्र में तहरीर दी है। शंकराचार्य शिविर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी जारी किए गए हैं, जिनमें कुछ लोग नारे लगाते दिखाई व सुनाई दे रहे हैं। पंकज पांडेय द्वारा दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व शनिवार शाम साढ़े छह बजे के आसपास लाठी.डंडों के साथ शंकराचार्य व उनके अनुयायियो को क्षति पहुंचाने की मंशा से पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। शिविर प्रभारी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उधरए एसपी माघ मेला नीरज पांडेय का कहना है कि नारेबाजी की सूचना मिली थी। तहरीर अभी प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद जांच कराई जाएगी|

विश्वविद्यालय के छात्रों ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान है। बटुकों और संन्यासियों की शिखा और चोटी पकड़कर घसीटना और पीटने की घटना से हर धर्मावलंबी को अंदर से हिलाकर रख दिया गया है। विश्वविद्यालय के पुरनियों की पहल पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के न्याय की लड़ाई में शहरियों को एकजुट करने के लिए पहल शुरू हुई है। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष श्यामकृष्ण पांडेय ने कहा कि इलाहाबाद की धरती हमेशा से न्याय के साथ खड़ी हुई है। ऐसे में जब सनातन के सबसे बड़े गुरु शंकराचार्य के सम्मान से खिलवाड़ हो तो यह जरूरी हो जाता है कि शहर के छात्रनेता, अधिवक्ता, बुद्धिजीवी, लेखक आदि लोग एक होकर इस लड़ाई को मजबूती दें।

पूर्व अध्यक्ष अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि जिस प्रकार बटुकों के साथ मारपीट की गई, वह अन्यायपूर्ण है। हम सबको इसके खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी। इसी कारण हर राजनीतिक दल के नेताओं को एक मंच पर आकर संघर्ष में साथ देना होगा। पूर्व अध्यक्ष के के राय व सपा नेता संदीप यादव ने कहा कि संगम की रेती पर संत.संन्यासियों पर हमला माघ मेला की संस्कृति पर हमला है।

पूर्व उपाध्यक्ष बाबा अभय अवस्थी व महामंत्री अंशुमान मिश्र ने कहा कि भाजपा का असली चाल.चेहरा व चरित्र सामने आ गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने से रोकने का विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के महासचिव मुकुंद तिवारी ने चौक स्थित पार्टी कार्यालय में पदाधिकारियों और नेताओं संग बैठक कर प्रस्ताव पारित किया जिसमें शंकराचार्य के अपमान को लेकर शहर के प्रत्येक वार्ड में जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने कहा का  जिम्मेदार अफसरों की संवादहीनता से शंकराचार्य के साथ.साथ संपूर्ण सनातनियों का घोर अपमान हुआ है। जन जागरण के जरिये यह बात लोगों तक पहुचाएंगे, ताकि चाल , चरित्र और चेहरा उजागर हो सके। वहीं , प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के शासन में साधु-संत भी सुरक्षित नहीं हैं।

उन्होंने कहा की सरकार के दबाव में प्रशासन धार्मिक नगरी को राजनीति का अखाड़ा बनाने पर उतारू है। कांग्रेसियों ने राज्यपाल से मामले में स्वतः संज्ञान लेकर प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस दौरान हसीब अहमद, अनूप त्रिपाठी, मनोज पासी, दीपचंद्र शर्मा, राजेश्वरी पटेल,  मोहम्मद हसीन, भानु कुशवाहा, सुनील यादव आदि उपस्थित रहे |

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेल प्रशासन विवाद को लेकर साधु-संतों मे दो फाड़ हो गए हैं | श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य  याचिकाकर्ता दिनेश फलहरी ने शंकराचार्य को स्नान कराने  के लिए मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखा है | द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है | इसे तमाम संत हैं जो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पक्ष मे सनातन का समर्थन कर रहे हैं| उनका कहना है साधु-संत का अपमान सनातन धर्म का अपमान है |

तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर ही सवाल उठा दिया| उन्होंने शंकराचार्य के रथ या पालकी पर चढ़कर स्नान करने जाने को सही नहीं बताया| स्वामी अधोकक्षजानंद महाराज ने पालकी परंपरा से स्नान करने जाने को गलत बताया | उनका कहना था कि जब सभी संत महात्मा पैदल स्नान करने जा रहे है तो उन्हे भी पैदल ही जाना चाहिए और प्रशासन के बनाए नियमों का पालन करना चाहिए | संत को शांत चित्त होना चाहिए, उसको उग्र होना नहीं चाहिए|  

साकेत धाम आश्रम बड़ा भक्तमाल राजगढ़ मध्य प्रदेश के जगद्गुरु स्वामी राम सुभग देवाचार्यजी महाराज बिनैका बाबा ने कहा है कि अच्छा कार्य होता है तो वह उपद्रव फैलाते हैं। संन्यासी का न तो कोई मान.सम्मान होता है न ही अपमान होता है। जब कोई व्यक्ति संन्यास धारण करता है, उसी समय सब कुछ नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा है कि माघ मेले में यह कोई परंपरा और नियम नहीं है कि कोई भी व्यक्ति पालकी से स्नान करने जाए। अन्य शंकराचार्यों ने भी बगैर पालकी के संगम स्नान किया है। उन्होंने कहा संत समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के साथ खड़ा है।

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