ट्रिपल आई टी में जेनरेटिव एआई एवं मानव–रोबोट अंतःक्रिया कार्यशाला में विशेषज्ञों का जमावड़ा
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में शुक्रवार को तीन दिवसीय छठे अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला “जेनरेटिव एआई एवं मानव–रोबोट अंतःक्रिया” के कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन संबोधन में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं चिकित्सा नवप्रवर्तक डॉ. आलोक मिश्रा ने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)आधारित तकनीकें रोगों के अधिक सटीक, समयबद्ध एवं व्यक्तिगत निदान तथा उपचार को संभव बना रही हैं, जिससे रोगी-परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।
डॉ. मिश्रा ने चिकित्सा निदान में रोबोटिक्स और एआई के वास्तविक अनुप्रयोगों का उल्लेख करते हुए रोबोट-सहायित एंडोस्कोपी, एआई-संचालित इमेजिंग प्रणालियों तथा प्रारंभिक रोग-पता लगाने के लिए प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स जैसे उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जेनरेटिव एआई मॉडल जटिल चिकित्सीय डेटा के विश्लेषण में चिकित्सकों की सहायता कर रहे हैं, जिससे मानवीय त्रुटियों में कमी आ रही है और निर्णय-प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो रही है|
उन्होंने कहा रोबोटिक्स के साथ संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक चिकित्सा में क्रांति ला सकती है, जिससे निदान अधिक तेज़, सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा। उन्होंने इन उन्नत तकनीकों के नैतिक एवं प्रभावी उपयोग हेतु चिकित्सकों, इंजीनियरों और एआई शोधकर्ताओं के बीच अंतर्विषयक सहयोग के महत्व पर भी बल दिया|
कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो. जी. सी. नंदी ने बताया कि यह कार्यशाला संस्थान के सेंटर फॉर इंटेलिजेंट रोबोटिक्स द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसका मुख्य विषय “मानव–रोबोट अंतःक्रिया हेतु जेनरेटिव एआई” है। उन्होंने कहा कि एआई को मानव क्षमताओं के विस्तार के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि उनके प्रतिस्थापन के रूप में। साथ ही उन्होंने सतत एवं सामाजिक रूप से लाभकारी एआई नवाचारों के लिए अंतर्विषयक अनुसंधान और नैतिक उत्तरदायित्व को आवश्यक बताया।
आगामी तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला के अंतर्गत विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं तथा हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं आयोजित की जाएगी, जिनमें बुद्धिमान रोबोटिक्स, स्वास्थ्य-स्वचालन, मानव-सचेत एआई प्रणालियां तथा एआई के नैतिक चुनौतियों जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई-आधारित मॉडलिंग, सिमुलेशन और डेटा एनालिटिक्स यांत्रिक अभियांत्रिकी में स्मार्ट डिजाइन, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस और बुद्धिमान रोबोटिक प्रणालियों को सशक्त बना रहे हैं।
कार्यक्रम में अल-फुत्तैम ग्रुप रियल एस्टेट, दुबई के कॉरपोरेट फाइनेंस प्रमुख श्री जयदीप सिंह ने मानव–रोबोट अंतःक्रिया के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भविष्य की रोबोटिक प्रणालियों का विकास मानव व्यवहार, सुरक्षा और अनुकूलनशीलता की गहन समझ के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जेनरेटिव एआई ऐसे रोबोट विकसित करने में सहायक हो सकता है|
प्रो. सोनाली अग्रवाल ने विद्यार्थियों एवं युवा शोधकर्ताओं को मूलभूत इंजीनियरिंग ज्ञान को सुदृढ़ करने के साथ-साथ वास्तविक जीवन की समस्याओं—विशेष रूप से स्वास्थ्य, विनिर्माण और बुद्धिमान स्वचालन—के समाधान हेतु एआई उपकरणों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उद्घाटन सत्र में आईआईटी बॉम्बे के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. अनिर्बान गुहा विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल कंप्यूटर विज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह इंजीनियरिंग, विनिर्माण और मानव–मशीन सहयोग का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।
कार्यशाला में मानव-केंद्रित प्रौद्योगिकियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया। इस कार्यशाला में देश-विदेश से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया|

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