सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा की अलख जगाई जब महिलाओं और दलितों को पढ़ने.लिखने से वंचित रखा जाता था: डॉ मानसिंह

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) देश की प्रथम महिला शिक्षिकाए समाज सुधार की अग्रदूत और नारी शिक्षा की प्रतीक सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई जब महिलाओं और दलितों को पढ़ने.लिखने से वंचित रखा जाता था। 

      समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में गरिमामय वातावरण में उनकी जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी में संबोधन में  एमएलसी डॉ मानसिंह यादव ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई जब महिलाओं और दलितों को पढ़ने.लिखने से वंचित रखा जाता था। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों, जातिवाद और पितृसत्ता के खिलाफ संघर्ष करते हुए न केवल लड़कियों के लिए स्कूल खोले बल्कि समाज को बराबरी , न्याय और मानवता का संदेश दिया।

    डॉ सिंह ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने समाज में फैली असमानताओं को खत्म करने के लिए उन्होंने लेखन और सामाजिक कार्य को हथियार बनाया। उनके द्वारा रचित कविताएं और लेख आज भी समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं।

    जिलाध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी सदैव सामाजिक न्याय ,समानता और शिक्षा के अधिकार की पक्षधर रही है। सावित्रीबाई फुले के विचार समाजवादी विचारधारा से मेल खाते हैं, क्योंकि उन्होंने शोषित.वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। आज के समय में जब शिक्षा के निजीकरण और महंगाई के कारण गरीब तबके के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तब सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।

       इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने संकल्प लिया कि पार्टी सावित्रीबाई फुले के सपनों का भारत बनाने के लिए शिक्षा , समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को और तेज करेगी।  सावित्रीबाई  फुले अमर रहें, और शिक्षा से ही समाज बदलेगा, जैसे नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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