त्रिवेणी पर उमड़ा आस्था का महासागरए लगभग दो करोड 10 लाख लोगो ने किया स्नान

प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेला के पंचवे स्नान पर्व श्माघी पूर्णिमाश् पर पुष्य नक्षत्र के  विशेष योग में  लगभग दो करोड़ 10 लाख   श्रद्धालुओं ने माघी पूर्णिमा पर संगम मेंआस्था की डुबकी लगाई। ठंड पर श्रद्धालुओ की आस्था भारी पड़ी।

मेला  सूत्रों ने बताया कि पतित पावनी गंगाए श्यामल यमुना और अन्तः सलिला स्वरूप मे प्रवाहित सरस्वती कि त्रिवेणी मे श्रद्धालुओं ने आस्था का महासागर माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर मध्यरात्रि से ही अपार श्रद्धा ए उत्साह और आस्था के साथ   संगम में आस्था की डुबकी  लगानी शुरू कर दिया। मध्यरात्रि से ही स्नान करना शुरू कर दिया था।

   सुबह घना कोहरा होने के कारण लोगो को एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चलते देखा गया।  इस बार मेला 8000 हेक्टेयर में बसाया गया है।

        माघ मेला का आयोजन न केवल आस्था , विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है , बल्कि एकता, समता और सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत उदाहरण के रूप में भी है। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान एवं पूजाण्अर्चना शुरू की।  इस अवसर पर दो करोड़ 10 लाख  श्रद्धालु संगम में पावन डुबकी लगाकर भारत की सनातन संस्कृति एवं परंपराओं का साक्षात् दर्शन करा चुके हैं। सनातन परंपराओं का पालन करते कल्पवासियों एवं श्रद्धालुओं का यह विहंगम दृश्य आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत है।

      संगम तट पर कोहरा और शीत लहर पर आस्था भारी पड़ती दिखलाई पड़ीद्य श्रद्धालु हर हर गंगेए ॐ नमः शिवाय का जेपी करते आस्था कि डुबकी लगा रहे थेद्य यूवाए बुजुर्गए बच्चेए महिलाये सभी माँ गंगा को प्रणाम कर स्नान कियाद्य घाट पर पुलिस के मनाही के बाद भी महिलाये धूपए दीप से पूजन करती नजर आईद्य बहुत से श्रद्धालु  गंगा मैया को पुष्पए दुग्ध अर्पित और सूर्य भगवान को अर्ध्य दे कर परिजनों के लिए निरोग काया और सुख.समृद्धि का आशीष मांगा।।    

      मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया हम रात 12 बजे से यहां हैं। तब से पवित्र स्नान जारी है। माघी पूर्णिमा पर   लगभग दो करोड़ 10 लाख  लोगो ने स्नान किया। जैसे जैसे दिन चढ़ता गया श्रद्धलुओं की भीड़ बढ़ती गई। उन्होंने बताया हमारी खोया.पाया सेवा एक्टिव है। हम भीड़ की निगरानी कर रहे हैं। मुख्य मकसद यह है कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

     रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ पूरे माघ माह कल्पवास करने वाले श्रद्धालु आज माघ पूर्णिमा का स्नान कर अपने घरों की ओर प्रस्थान शुरू कर दिया।  संगम घाट पर एटीएस भी तैनात है।

       मान्यता  है कि ब्रह्म मुहूर्त में गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। माघ मास में किए गए स्नानए दानए व्रत और तप के सभी संकल्प माघी पूर्णिमा के दिन पूर्ण होते हैं। इस अवसर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। पीले पुष्प , तुलसी दलए दीप और नैवेद्य अर्पित कर उनकी आराधना की जाती है। विष्णु सहस्त्रनामए श्रीमद् भागवत पाठ और द्वादशाक्षर मंत्र का जप विशेष पुण्य और फलदायी होता है ।

  संगम के तट पर  आस्था की डुबकी लगाने के लिए शुक्रवार से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थीद्य  इस अवसर पर भारतीयों के साथ.साथ विदेशियों ने भी त्रिवेणी संगम पर अमृत स्नान किया ।  वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ देश.विदेश से आए श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य स्नान किया। माघ मेल मे दूर दराज से आए साधु.संत , योगी , विद्वान और श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बने।

             जप , तप और साधना की त्रिवेणी के प्रवाह के साक्षी रहे कल्पवासियों की माघ पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ विदाई हो गई। ब्रह्म मुहूर्त में त्रिवेणी में माघ पूर्णिमा की डुबकी लगाकर कल्पवासी अपने शिविर पहुंचे। यहां से अनुष्ठान के बाद कल्पवासी कल्पवास  की आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर यहां से प्रस्थान करना  शुरू कर दिए। मेला क्षेत्र से कल्पवासियों की सकुशल घर वापसी के लिए मेला प्रशासन ने अलग योजना बनाई गई और उसपर अमल भी किया गया। श्रद्धालुओं के स्नान के सकुशल सम्पन्न होने के बाद कल्पवासी अपने वाहनों से अपना सामान लेकर विदा हो रहे है।  

         माघी पूर्णिमा स्नान के बाद मेल करीब 80 फीसदी समापन कि ओर बढ़ चल है द्य महाशिवरात्रि स्नान के बाद माघ मेला का समापन हो जाएगा।  श्रद्धालुओं के लिए पूरे मेला क्षेत्र में व्यापक इंतजाम किए थेए ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा स्नान के बाद घाटों पर अधिक समय न बिताकर शीघ्र गंतव्य की ओर बढ़ने की लोगों से बराबर अपील भी की जाती रही। जिससे श्रद्धालुओं को माघ पूर्णिमा के स्नान के लिए बड़ी सुविधा मिली।

मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया हैद्य साथ ही रूट डायवर्जन भी लागू किया हैद्य माघ पूर्णिमा स्नान के बाद से ही 3 जनवरी से चल रहा कल्पवास पूरा हो गया द्य मत्स्य पुराण में कहा गया  है कि माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर समस्त देवी दृदेवता धरती पर आते हैं और मनुष्य रूप में संगम में स्नान करते हैंण् यही कारण है कि पवित्र संगम में स्नान के बाद गरीबों को कपड़े , भोजन,  गुण , तिल , देशी घी, फल व अन्न का दान विशेष फलदायी होता हैए इससे जीवन में सुख शांति रहती है।

       स्नान घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात हैद्य पांटून पुलोंए प्रमुख चौराहों और भीड़ वाले स्थानों पर ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है द्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैंद्य जोन और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की गई हैद्य

      माघ मेला एसपी नीरज पांडेय ने बताया कि भीड़ के दबाव को देखते हुए पूरे जिले में सतर्कता बढ़ा दी गई हैण् सीमावर्ती इलाकों में बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच की जा रही हैण् संदिग्ध लोगों से पूछताछ और पहचान पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा हैद्य शहर के होटलए धर्मशाला और गेस्ट हाउस में भी जांच अभियान चलाया गया हैण् मेला क्षेत्र में सामान्य वाहनों की एंट्री रोकी गई हैद्य केवल आवश्यक सेवाओं और एंबुलेंस को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास