जेके लक्ष्मी ने लॉन्च किया ग्रीन प्रो एलसी3 सीमेंट, कार्बन उत्सर्जन में 40 प्रतिशत कमी का दावा

नयी दिल्ली, 09 फरवरी (वार्ता) जेके लक्ष्मी सीमेंट ने सोमवार को अपने ग्रीन प्रो एलसी3 सीमेंट के वाणिज्यिक लॉन्च की घोषणा की जिसके बारे में कंपनी का कहना है कि इसके उत्पादन में पोर्टलैंड सीमेंट की तुलना में 40 प्रतिशत कम कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन होता है।
कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में यहां एक कार्यक्रम में यह उत्पाद पेश करते हुए कंपनी ने बताया कि इस सीमेंट का निर्माण यह सीमेंट क्लिंकर, केल्साईन्ड क्ले, लाईमस्टोन और जिप्सम के संयोजन से बनता है। यह पानी कम सोखता है और इससे बने ढांचों की जीवनकाल अधिक होता है यानी वे लंबे समय तक चलते हैं।
जेके लक्ष्मी सीमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक अरुण शुक्ला ने बाद में मीडिया को बताया कि कंपनी राजस्थान के सिरोही में इस सीमेंट का उत्पादन कर रही है। उन्होंने कहा कि एलसी3 सीमेंट कंपनी के सबसे सस्ते उत्पाद की तुलना में प्रति बोरी 35 रुपये तक महंगा होगा, लेकिन यह देखते हुए कि इससे बनी संरचना ज्यादा टिकाऊ होती है, कुल मिलाकर ग्राहकों के लिए यह सस्ता पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि पानी में रहने पर पारंपरिक सीमेंट की तुलना में इस सीमेंट से कम ऊष्मा निकलती है जिससे बांध, पुल आदि बनाने और समुद्री इलाकों में निर्माण के लिए यह ज्यादा उपयोगी होगा। सिरोही संयंत्र से 28 जनवरी को इसका कमर्शियल उत्पादन शुरू हो गया है और राजस्थान में यह वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध है। बाद में उत्तर और पश्चिमी के राज्यों में इसकी आपूर्ति की जायेगी।
कंपनी के विपणन प्रमुख चंद्रभान ने यूनीवार्ता को बताया कि उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहे नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने इस सीमेंट के इस्तेमाल की प्रतिबद्धता जतायी है। उन्होंने कहा कि यह इस सीमेंट के इस्तेमाल से परियोजना को कार्बन क्रेडिट भी मिलेगा।
कंपनी ने बताया ग्रीन प्रो सीमेंट क्लोराईड इन्ग्रैस और सल्फेट अटैक के लिए ज्यादा रेजिस्टेंट है। इसके विकास पर 12 साल से कंपनी आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई के साथ मिलकर काम कर रही थी।
जेके लक्ष्मी सीमेंट की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विनीता सिंघानिया ने कहा कि यह वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध देश का पहला एलसी3 सीमेंट है और यह देश के निर्माण में बड़ा योगदान देगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास