माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर करीब 40 लाख श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

प्रयागराज( दिनेश तिवारी) दुनिया के सबसे बड़े अध्यात्मिक एवम सांस्कृतिक समागम माघ मेले के अंतिम स्नान महाशिवरात्रि पर लगभग 40 लाख.श्रद्धालुओं ने दुर्लभ संयोग में आस्था की डुबकी  लगाई।

 महाशिवरात्रि पर इस बार रविवार को सूर्य , चंद्र , बुध , शुक्र और राहु के साथ आने से उत्तम योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग , कुंभ राशि पर पंचग्रही योग , विशिष्ट संयोग के साथ अष्ट योग भी बन रहा है|

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि माघ मेले के अंतिम स्नान महाशिवरात्रि पर  लगभग 40 लाख श्रद्धालुओं ने दुर्लभ संयोग में आस्था की डुबकी  लगाई।इस वर्ष मेले में 22 करोड़ से अधिक लोगो ने स्नान किया ।सुबह से खुशनुमा माहौल रहा। सूर्य भगवान भी श्रधालुओ के प्रति प्रसन्न दिखे। सुबह से माघ  कोहरा और शीट लहार का घाट पर कोई असर नही दिखा। भगवान भास्कर सुबह से ही अपनी आभा बिखरते रहे।

 मेला प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर से श्रद्धालुओ को स्नान के बाद घाट खली करने और परिजनों के साथ रहने का अनुरोध करती रही| मेल मे परिजनों से बिछुड़े लोगों के लिए लगातार खोया-पाया केंद्र पर पहुंचकर संपर्क करने कि सलाह देते सुना दिए |

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम की रेती पर लगे विश्व के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक सालाना मेले का रविवार को 44वां और अंतिम दिन है। माघ मेले के छठवें और आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर संगम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।महाशिवरात्रि के अवसर पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी के पवित्र संगम में स्नान करने वालों का तांता लगा रहा।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही त्रिवेणी संगम के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। मेलाधिकारी ऋषिराज के मुताबिक सुबह सात बजे तक 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे। 

सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन के भी आलाधिकारी ग्राउंड जीरो पर मौजूद हैं। माघ मेले में बनाए गए साढ़े तीन किलोमीटर लंबे घाट पर श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। माघ मेले में सुरक्षा के लिए जहां यूपी पुलिस , पीएसी और आर ए एफ को तैनात किया गया है। वहीं एटीएस के कमांडो भी मेले में चप्पे पर नजर रख रहे हैं। मेले की सुरक्षा मे 400 सीसीटीवी कैमरों से कराई जा रही है। इसमें डेढ़ सौ से ज्यादा एआई कैमरे भी लगाए गए हैं।

 महाशिवरात्रि के पर्व पर श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर शिवालयों में भगवान शिव का अभिषेक करते दिखे । मंत्रोच्चारण  और भक्ति के साथ आस्था की परंपरा जारी है |  शिवालयों में भी सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। मेल क्षेत्र मे स्थित मनकामेश्वर मंदिर ,  नागवासुकी , सोमेश्वर महादेव एवं अन्य पौराणिक शिवालयों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों कि लंबी कतार लगी रही | महाशिवरात्रि के  छठवें और अंतिम स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला 2026 का औपचारिक समापन भी हो गया।

वैदिक शोध संस्थान एवं कर्मकांड के पूर्व  आचार्य डॉक्टर आत्माराम के अनुसार महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के आध्यात्मिक उत्सवों में सबसे महत्वपूर्ण है। शिव कोई पुरुष नहीं है अपितु वह ऊर्जा शक्ति है जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड वास करता है और हर जीव के भीतर इस ऊर्जा का निवास है। इसी ऊर्जा को शिव तत्व कहते हैं|

 उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर इस बार रविवार को सूर्य , चंद्र , बुध , शुक्र और राहु के साथ आने से उत्तम योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग , कुंभ राशि पर पंचग्रही योग , विशिष्ट संयोग के साथ अष्ट योग भी बन रहा है| इन योगों को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है। महाशिवरात्रि पर इस बार रविवार को सूर्य , चंद्र , बुध , शुक्र और राहु के साथ आने से उत्तम योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग , कुंभ राशि पर पंचग्रही योग , विशिष्ट संयोग के साथ अष्ट योग भी बन रहा है| रविवार के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा और शाम 7बजकर 26 मिनट तक श्रवण नक्षत्र का प्रवेश हो जाएगा। शाम 7 बजकर 26 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग रहेगा, जिसे पूजा.पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन बैजनाथ जयंती भी मनाई गई, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

आचार्य ने बताया कि इस बार के दुर्लभ योग शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाले होंगे। शास्त्रों के अनुसार एक साल में 11 मास शिवरात्रि होती हैं। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि महाशिवरात्रि होती है क्योंकि इस दिन भोलेनाथ का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था।

महाशिवरात्रि पर नौ साल बाद पंचग्रही योग का दुर्लभ संयोग बना है। विशेष संयोग है कि महाशिवरात्रि रविवार को है फिर अगले ही दिन सोमवार भी श्रद्धालुओं के लिए शुभ फलदायी रहेगा। विद्वानों के मुताबिक बुधादित्य राजयोग में पूजा से मान.सम्मान, पद.प्रतिष्ठा और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि, लक्ष्मी.नारायण योग में धन , समृद्धि, विलासिता और व्यापार में बड़ा लाभ , शुक्रादित्य योग में कलात्मक सफलता सुख.सुविधाएं और सामाजिक वर्चस्व बढ़ता है।

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