ध्वस्तीकरण मामले में प्रक्रिया जारी रखें पर बिना इजाजत किसी भी स्थिति में घर न गिराएं :उच्च न्यायालय
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।
हमीरपुर के सुमेरपुर थाना क्षेत्र निवासी फैमुद्दीन , मोइनुद्दीन और जैबुन निसा ने अपनी संपत्तियों के ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने पूर्व के आदेश में बुलडोजर कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में दंड स्वरूप लोगों की इमारतें तोड़ी जा रही हैं।न्यायालय ऐसे कई मामलों का गवाह है। सजा के तौर पर इमारतों को तोड़ना शक्तियों के बंटवारे का खुला उल्लंघन है। सजा देने का अधिकार न्यायपालिका के पास है। न्यायालय ने कई बिंदुओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। इसके लिए राज्य को दो सप्ताह का और समय दिया है। 25 फरवरी को अगली सुनवाई होगी। तब तक संपत्तियों को गिराने पर अंतरिम रोक जारी रहेगी।

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