अमेरिका से व्यापार समझौता 'नपा-तुला', देश की हित-जरूरत की दृष्टि से न्यायोचित और संतुलित: गोयल


अमेरिका से व्यापार समझौता 'नपा-तुला', देश की हित-जरूरत की दृष्टि से न्यायोचित और संतुलित: गोयल

नयी दिल्ली, 07 फरवरी (वार्ता) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को एक "बहुत बेहतरीन करार" बताते हुए कहा कि इसे "देश के हितों और जरूरतों को ध्यान में रखकर नपे-तुले अंदाज में किया गया है।"




उन्होंने कहा कि यह 175 करोड़ लोगों के दो बाजारों के बीच का समझौता है। भारत और अमेरिका आर्थिक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों देशों में श्रम की लागत या प्रति व्यक्ति आय के स्तर पर कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय लगभग 90,000 डॉलर है जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग 3,000 डॉलर है, जो आर्थिक पूरकता को दर्शाती है।


 श्री गोयल ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर संयुक्त वक्तव्य की घोषणा के बाद शनिवार को यहां आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अमेरिका ने भारत के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों के लिए भारतीय माल पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। ...कुछ वस्तुओं पर अमेरिका में शुल्क शून्य हो जायेगा।"


 उन्होंने कहा कि भारत के 13 अरब डॉलर के जेनेरिक फार्मा निर्यात को पहले की तरह अमेरिका में शून्य शुल्क दर पर प्रवेश जारी रहेगा। स्मार्ट फोन पर भी पहले की तरह शून्य शुल्क बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आगे चलकर ढेर सारी वस्तुओं और बहुत से कृषि उत्पादों पर अमेरिका में लगा जवाबी (प्रत्यानुवर्ती शुल्क) शून्य हो जायेगा।


 उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क की 18 प्रतिशत की दर हमारे पड़ोसियों और प्रतिस्पर्धी देशों से कम है। वाणिज्य मंत्री ने इसी संदर्भ में अमेरिका में चीन पर 35 प्रतिशत, वियतनाम पर 35 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत और इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत की दर से लागू शुल्कों का उल्लेख किया।


 पिछले साल अगस्त से भारतीय सामानों पर अमेरिका में 50 प्रतिशत की दर से शुल्क लगा हुआ था।


 उल्लेखनीय है कि कपड़ा एवं परिधानों, होम डिकोर, चमड़ा, मछली-झींगा, कृषि उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा मशीनरी के निर्यात कारोबार में ये देश भारत को टक्कर देते हैं।


 वाणिज्य मंत्री ने कहा, "खुशी की बात है कि कई सारे कृषि उत्पाद अब अमेरिका में शून्य शुल्क पर जायेंगे।" उन्होंने समझौते के बारे में विपक्ष की आलोचनाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा, "कुछ लोग जो भारत के किसानों की भलाई नहीं चाहते, जो उन्हें गुमराह करते रहते हैं, उन्हें हैरानी है कि कई कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क हासिल करने के बावजूद हमने कृषि उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी।"


 उन्होंने कहा, "मैं डंके की चोट पर कह सकता हूं कि यह करार भारत के किसानों, एमएसएमई और हमारे दस्तकारी क्षेत्र को नुकसान नहीं करता है।" उन्होंने कहा कि इस करार से कारीगरों, 'विश्वकर्मा' वस्त्र क्षेत्र, चमड़ा, खेल के सामानों जैसे बहुत से उत्पादों को अमेरिका में कम शुल्क पर निर्यात का मौका मिलेगा।


 उन्होंने समझौते को "संतुलित और न्यायोचित" बताते हुए कहा, "इस समझौते से हमारे किसानी क्षेत्र को बचते हुए कारोबार और आर्थिक हितों को प्रोत्साहित करने का दोहरा उद्देश्य पूरा हुआ है।"


 उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आभार प्रकट किया जिन्होंने फरवरी 2025 में द्विपक्षीय समझौते के लिए बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया था।


 श्री गोयल ने कहा कि स्टील, एल्यूमीनियम और तांबे पर अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर जो ऊंचा शुल्क लगा रखा है, वह "केवल भारत नहीं, दुनिया के सभी देशों के लिए है"।


 उन्होंने कपास और सेब जैसे उत्पादों को खोलने के बारे में कहा कि भारत कपास का आयात आज भी करता है, कल भी करता था। हमारे यहां लम्बे रेशे की कपास नहीं होती। उद्योग उसके लिए सस्ती दर पर आयात की मांग करता रहता है।


 सेब के बारे में वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत में हर साल छह लाख टन सेब का आयात हो रहा है। इस पर न्यूनतम 50 रुपये प्रति किलोग्राम और 50 प्रतिशत शुल्क की शर्त लागू है। इस तरह आयातित सेब 75 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से कम पर आयात नहीं किया जा सकता।


 उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ समझौते के तहत सेब का आयात न्यूनतम 80 रुपये प्रति किलोग्राम और 25 प्रतिशत के शुल्क साथ मंगाया जा सकेगा। इस तरह इस समझौते में आयातित सेब न्यूनतम 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आयात होगा।


 अमेरिका को सोयाबीन तेल पर कोटा-आधारित शुल्क रियायतें दी गयी है। इस संबंध में पूछे जाने पर श्री गोयल ने अमेरिका से सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों के शून्य शुल्क पर आयात छूट के बारे में कहा कि जिनमें एनवीडिया के कंप्यूटिंग चिप्स, एआई उपकरण और डेटा सेंटर में लगने वाले घटक शामिल हैं जिसमें अमेरिका की महारथ है। इससे भारत में इन क्षेत्रों के विकास को बल मिलेगा।


 उन्होंने कहा कि यह कदम उन देशों से भारत के हितों की रक्षा करता है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में लागत से कम मूल्य निर्धारण करते हैं या उत्पादन लागत से कम कीमत पर बिक्री करते हैं।


 वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिकी आईसीटी उत्पादों का आयात भारत की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां वैश्विक तकनीकी मांगों के अनुरूप बनी रहेंगी। महत्वपूर्ण तकनीकों के आयात से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रहेगा।


 श्री गोयल ने कहा कि यह समझौता समयानुकूल है और इससे भारत में कृत्रिम मेधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-आधारित उद्योगों में देश की महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी तथा भारत के प्रौद्योगिकी पारितंत्र के लिए बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।


 गोयल ने कहा, "इस साझेदारी से भारत को उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक उपकरण मिलेंगे।"


 वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत कमजोर नहीं है, भारत आत्मनिर्भर है। भारत के डेयरी सेक्टर में कोई समझौता नहीं किया गया है और किसी भी शर्त के साथ इसे नहीं खोला गया है। जिन उत्पादों में हम आत्मनिर्भर हैं, उन्हें समझौते से बाहर रखा गया है। कंप्यूटर और चिकित्सा उपकरणों पर रियायतें घोषित की गयी हैं।


 उन्होंने कहा कि अमेरिका को कंप्यूटर और चिकित्सा उपकरणों पर रियायतें दी गई हैं तथा इसमें भारतीय विनिर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा के लिए तैयारी करने का कुछ समय भी दिया जा रहा है।


 करार के तहत डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स, वाइन और स्पिरिट्स का आयात शून्य शुल्क पर करेगा।


 कपड़ा और चमड़ा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। रेशम उत्पादों को भी शून्य शुल्क के दायरे में लाया गया है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह भारत-अमेरिका समझौता किसानों, एमएसएमई, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के हितों को किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाता।


 भारत में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) उत्पादों की अनुमति नहीं होगी। मक्का, चावल, गेहूं, मोटे अनाज और रागी जैसे स्टेपल्स पर कोई रियायत नहीं दी जायेगी। केला, खट्टे फल जैसे प्रचुर मात्रा में उगने वाले फलों पर भी कोई राहत नहीं है। मांस, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, सोयाबीन, चीनी और अनाज पर कोई रियायत नहीं दी गयी है। काबुली चना, एथेनॉल और तंबाकू को भी कोई राहत नहीं मिलेगी।


 उन्होंने कहा कि कई भारतीय निर्यातों पर अब पारस्परिक शुल्क शून्य कर दिया गया है, जिससे अमेरिका के साथ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


 लाभ पाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में विमानों के पुर्जे, मशीनरी के कलपुर्जे, जेनेरिक दवाएं, फार्मास्यूटिकल्स और बंगाल, केरल और महाराष्ट्र के रत्न-हीरे शामिल हैं।


 अन्य शून्य शुल्क वाले उत्पादों में सिक्के, प्लेटिनम, घड़ियां, आवश्यक तेल, झूमर जैसे होम डेकोर उत्पाद, बीज और अकार्बनिक रसायन शामिल हैं। कई कृषि उत्पाद भी अब अमेरिका में शून्य शुल्क पर प्रवेश करेंगे। यह व्यापार समझौता किसानों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उनके जीवनयापन की रक्षा करते हुए निर्यात अवसर बढ़ाता है।


 कृषि क्षेत्र में भारत के कई उत्पाद अब अमेरिका को शून्य शुल्क पर निर्यात होंगे। इनमें चाय, मसाले, नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स, सुपारी,मब्राजील नट्स, चेस्टनट्स और विभिन्न फल-सब्जियां शामिल हैं। सब्जियों की जड़ें, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल, खसखस और साइट्रस जूस भी बिना किसी पारस्परिक शुल्क के अमेरिका जाएंगे।


 इस समझौते के तहत भारत के रत्न-आभूषण और फार्मास्यूटिकल उत्पादों को भी शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और मेक इन इंडिया पहल को समर्थन मिलेगा।


 


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