केंद्रीय बजट जमीन पर उतरता दिखे तभी होगा सार्थक: मायावती

लखनऊ 01 फरवरी (वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद में पेश किए गए बजट में योजनाओं, परियोजनाओं और वादों के नाम भले ही बड़े हों, लेकिन असली कसौटी यह है कि उनका लाभ जमीन स्तर पर आम लोगों तक कितना पहुंचता है। उन्होंने कहा कि सर्वसमाज के हित में केवल बातें करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें सही नीयत के साथ अमल में लाना भी उतना ही जरूरी है।

रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का बजट सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी के नजरिये से नहीं, बल्कि पूंजीवादी सोच से प्रभावित प्रतीत होता है, जिसमें बड़े उद्योगपतियों और धनाढ्य वर्ग को प्राथमिकता मिलती दिखती है, जबकि गरीब, दलित और बहुजन समाज की अपेक्षाएं पीछे छूट जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति और नीयत का आकलन इस बात से होना चाहिए कि वास्तव में गरीबों और वंचितों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की बात तभी सार्थक होगी, जब सरकारी क्षेत्र को पर्याप्त महत्व देते हुए संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की भावना के अनुरूप ठोस कदम उठाए जाएं। मायावती ने यह सवाल भी उठाया कि पिछले वर्ष के बजट में किए गए दावे और वादे कितने पूरे हुए तथा क्या लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार देखने को मिला है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि वर्तमान बजट को भी केवल औपचारिकता बनकर रह जाने से बचाना होगा। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि वह बजट प्रावधानों के वास्तविक प्रभाव पर प्रकाश डाले, ताकि जनता को भरोसा हो सके कि यह बजट व्यापक जनहित और देशहित से जुड़ा है।

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