शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे सरकार: माता प्रसाद

लखनऊ, 20 फरवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में प्रदेश पर बढ़ते कर्ज, कंसोलिडेटेड फंड और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार को वित्तीय प्रबंधन और जनसेवाओं के मुद्दे पर घेरा, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब दिया।
माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि प्रदेश पर नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार इस मुद्दे से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट बनाते समय वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा। इस पर सुरेश खन्ना ने शुरुआत में आपत्ति जताई, हालांकि बाद में कर्ज के आंकड़े को स्वीकार किया।
नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अस्पतालों से मरीजों को मेडिकल कॉलेजों और बड़े संस्थानों में रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जीवन-मरण से जुड़ा विषय है, इसलिए यहां संविदा और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में एक हजार लोगों पर केवल 0.37 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक एक हजार पर एक डॉक्टर का है। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में दवाओं की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता भी उन्होंने प्रमुख समस्या बताई।
पांडेय ने कहा कि यदि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज ठीक से कार्य करें तो मरीजों को लखनऊ के बड़े संस्थानों, जैसे संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, में रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने आयुष्मान योजना की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग को “दलालों से बचाने” की भी मांग की।
प्रतिव्यक्ति आय और विकास के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार आंकड़ों से खेल रही है और वास्तविक स्थिति को छिपा रही है।
उन्होंने समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए लखनऊ के इकाना स्टेडियम, लोक भवन, पुलिस मुख्यालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय परिसर के विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने चुनौती दी कि वर्तमान सरकार एक्सप्रेसवे के अलावा कोई बड़ा विकास कार्य गिनाए। साथ ही कई विभागों में पूरा बजट खर्च न होने और केंद्र से मिलने वाले कर हिस्से में कमी आने का मुद्दा भी उठाया।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आलोचना छोड़कर जनहित के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

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