विद्या भारती के सप्तशक्ति संगम में पर्यावरण संरक्षण और कुटुंब प्रबोधन का संकल्प
नयी दिल्ली, 21 फरवरी (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) से संबंधित विद्या भारती के दिल्ली प्रांत की ओर से शनिवार को यहां सप्तशक्ति संगम का आयोजन किया गया, जिसमें मातृशक्ति ने पर्यावरण संरक्षण एवं कुटुंब प्रबोधन का राष्ट्रीय संकल्प लिया।विद्या भारतीय अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मातृशक्ति के सशक्तिकरण, संगठन और जागरण के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम को भगवद्गीता के दशम अध्याय में वर्णित स्त्री की सात दिव्य शक्तियों श्री, वाक्, कीर्ति, मेधा, क्षमा, धृति एवं स्मृति को जागृत करने के भाव से संचालित किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्या भारती की ओर से देशभर में लगभग 22,000 कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिसमें 26 लाख से अधिक मातृशक्ति ने भाग लिया। विद्या भारती के दिल्ली प्रांत की ओर से आज कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया आयोजित संगम में लोकसभा सांसद कमलजीत सहरावत उपस्थिति रही। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन में नारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा परिवार में नारी सम्मान को बनाए रखना सामाजिक स्थिरता का आधार है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का अंग बनाने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुईं हंस राज कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रमा शर्मा ने नारी को राष्ट्र की आधारशिला बताते हुए उसके समग्र विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नारी की उपलब्धियाँ चाहे जितनी व्यापक हों, मातृत्व का गुण उसे सर्वोच्च गरिमा प्रदान करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षा भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सह सचिव डॉ. ज्योति चौथाईवाले ने किया। इस दौरान उन्होंनेकहा कि सशक्त परिवार ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं और परिवार सुदृढ़ीकरण में नारी की भूमिका केंद्रीय है।
कार्यक्रम की संयोजिका कविता विश्नोई ने दिल्ली प्रांत में आयोजित 84 संगमों का विवरण प्रस्तुत किया। वहीं, उत्तर क्षेत्र संयोजिका गीता आहूजा ने अखिल भारतीय स्तर पर संचालित संगमों का प्रतिवेदन रखा। संगमो का उद्देश्य प्रांत टोली सदस्या लक्ष्मी सिंह द्वारा रखा गया तथा मंच संचालन सुनीता जैन द्वारा किया गया।
दिल्ली प्रांत के समापन समारोह में 200 से अधिक प्रबुद्ध और सक्रिय महिलाओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित मातृशक्ति द्वारा भारतीय जीवन मूल्यों के अनुरूप स्वयं को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया।

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