पहली बार सॉफ्टवेयर से नियुक्त हुए 6980 अंकेक्षक प्रधानाचार्यों को मिली अहम जिम्मेदारी
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाली संस्था माध्यमिक शिक्षा परिषद( यू पी बोर्ड) की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बुधवार से 250 केंद्रों पर शुरू हो गया है।
हाईस्कूल की कॉपियों की जांच के लिए 117 और इंटरमीडिएट स्तर की कॉपियों की जांच के लिए 111 और दोनों कॉपियों की जांच के लिए 22 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। इस कार्य में 1 लाख 53 हज़ार कार्मिक लगाए गए हैं।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा है कि मूल्यांकन की निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। 18 मार्च से एक अप्रैल तक प्रदेश के 250 केंद्रों पर मूल्यांकन होगा। 75 संकलन केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्रों को भेज दिया गया है। मूल्यांकन कार्य के संचालन के लिए 75 मुख्य नियंत्रक और 250 उप नियंत्रकों की नियुक्ति की गई है।
हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लगभग 4300 अंकेक्षक 8550 उप.प्रधान परीक्षक और 83 , 800 परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। वहीं इंटरमीडिएट स्तर पर करीब 2590 अंकेक्षक , 5300 उप.प्रधान परीक्षक और 48 , 990 परीक्षकों की तैनाती की गई है।
उन्होंने कहा कि हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा.2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के गुणवत्तापूर्ण और त्रुटिरहित मूल्यांकन के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षक (ऑडिटर) नियुक्त किए हैं, इनमें प्रधानाचार्य और वरिष्ठ शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। परिषद का मानना है कि इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को त्रुटिरहित और निष्पक्ष परिणाम मिल सकेगा।
अंकेक्षक मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं में से 15 प्रतिशत कॉपियों का रैंडम परीक्षण करेंगे कि मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि या अंक गणना में गलती न हो। पहले यह जिम्मेदारी मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों के माध्यम से तय होती थीए लेकिन पूर्व में कई तकनीकी और अंक गणना संबंधी त्रुटियां सामने आने के बाद परिषद ने व्यवस्था में बदलाव किया है।
बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि त्रुटिरहित और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों की वरिष्ठता , प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक विशेषज्ञता के आधार पर उन्हें अंकेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इससे लोगों में मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और समाज व अभिभावकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।

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