जनगणना में आदिवासी धर्म कॉलम शामिल करने की मांग तेज


सोनभद्र 08 मार्च (वार्ता) वर्ष 2026 में प्रस्तावित जनगणना में आदिवासी धर्म के लिए अलग कॉलम शामिल किए जाने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों और रोजगार सामाजिक अधिकार अभियान द्वारा 10 मार्च को लखनऊ के ईको गार्डन में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग भाग लेंगे।

कार्यक्रम के संयोजक इंजीनियर रामकृष्ण बैगा ने बताया की भारत में जनगणना की शुरुआत वर्ष 1871 से हुई थी। 1871 से 1951 तक की जनगणनाओं में आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कॉलम की व्यवस्था थी, जिससे उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान दर्ज होती थी लेकिन 1961 की जनगणना से यह कॉलम हटा दिया गया। इसके बाद से आदिवासी समाज की अलग धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को जनगणना में दर्ज करने की व्यवस्था समाप्त हो गई, जिससे उनकी पहचान और अस्तित्व के सामने चुनौती उत्पन्न हो रही है।
आदिवासी समाज का मानना है कि उनकी अपनी विशिष्ट आस्था, परंपराएँ और जीवन पद्धति है, जिसे किसी अन्य धर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसलिए जनगणना में अलग “आदिवासी धर्म कॉलम” का प्रावधान किया जाना आवश्यक है, ताकि उनकी वास्तविक जनसंख्या और पहचान का सही आकलन हो सके।
इसी मांग को लेकर 10 मार्च को लखनऊ में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया और आदिवासी समाज के लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूक किया गया।
इस अभियान में पिंटू आदिवासी, इं. राम कृष्ण बैगा, प्रधान योगेन्द्र गोंड, द्वारिका प्रसाद गोड़ तथा कोड़ियां के रविशंकर गोड़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजकों ने सभी जनपदवासियों और आदिवासी समाज के लोगों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचकर इस आंदोलन को मजबूत बनाएं और कार्यक्रम को सफल करें।

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