काशी में नव संवत्सर पर पूजे गए सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा; भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर सनातनी नव वर्ष का शुभारंभ


वाराणसी, 19 मार्च (वार्ता) हिंदू नव वर्ष 'विक्रम संवत 2083' का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार को काशी में श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हुआ। इस अवसर पर जागृति फाउंडेशन, ब्रह्मा वेद विद्यालय एवं स्वामीनारायणानंद तीर्थ वेद विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में असि स्थित पुष्कर तालाब पर 'नव संवत्सर उत्सव' का आयोजन किया गया।

यहाँ सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं आरती कर विश्व शांति की कामना की गई। इसके पश्चात, वेदपाठी बटुकों ने पुष्कर तालाब में भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में 'लोक भूषण' सम्मान से सम्मानित ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश मिश्र उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, भोजपुरी साहित्य शोध न्यास के महासचिव पंडित अरुण कुमार द्विवेदी एवं आचार्य पंडित वरुणेश चंद्र दीक्षित सम्मिलित हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने कहा, "आज सनातन हिंदू धर्म का नव संवत्सर मनाया जा रहा है। विशेष बात यह है कि वर्ष का शुभारंभ पुष्कर तालाब में भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर किया गया। हिंदू नव संवत्सर हमें सिखाता है कि प्रकृति के सानिध्य में रहकर ही मानव का कल्याण संभव है। प्रकृति का शोषण विनाश की ओर ले जाएगा, विकास की ओर नहीं।"
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि हिंदू नव संवत्सर की विशेषता यह है कि हम मातृशक्ति के पूजन (नवरात्रि) से वर्ष का आरंभ करते हैं। सनातन धर्म सदैव 'देने' की शिक्षा देता है। हमारी संस्कृति मानती है कि प्रकृति ही सर्वोच्च शक्ति है और इसके संरक्षण में ही मानवता का हित है।
कार्यक्रम के संयोजक रामयश मिश्र ने बताया कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के पूजन का उद्देश्य विश्व शांति की स्थापना है। उन्होंने कामना की कि वर्तमान में अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के मध्य व्याप्त युद्ध की स्थितियां समाप्त हों और संपूर्ण विश्व में सद्भाव कायम हो।

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