निजी परिसर में नमाज और धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगा सकते : उच्च न्यायालय
प्रयागराज,(दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि निजी परिसर में नमाज व धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगा सकते। सभी धर्मों को समान अधिकार है। संभल निवासी याची ने प्रशासन के नमाजियों की संख्या सीमित करने के आदेश को चुनौती दी थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। अनुच्छेद.25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को माननेए उसके अनुसार आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार देता है। यह अधिकार सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होता है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने रमजान के दौरान एक स्थल पर नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली संभल निवासी मुनाजिर खान की याचिका पर यह टिप्पणी की।
इससे पहले सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक कानून का शासन सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं तो इस्तीफा दे दें या ट्रांसफर करा लें।
याचिका में मुनाजिर ने गाटा संख्या 291 पर एक स्थल को मस्जिद बताते हुए वहां नमाज अदा करने की अनुमति मांगी थी। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि प्रशासन ने कानून.व्यवस्था का हवाला देकर नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित कर दी थी।
न्यायालय ने कहा. जरूरत पर पूजास्थल व उपासकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।
न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि निजी स्थान पर प्रार्थनाओं के खिलाफ कोई व्यक्ति या समूह आपत्ति जताता है तो प्रशासन को उसका संज्ञान लेना चाहिए। जरूरत पर पूजास्थल व उपासकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। सार्वजनिक व्यवस्थाए नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर ही इन अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं , लेकिन किसी को अपने निजी परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से इबादत करने से नहीं रोका जा सकता।
याचिकाकर्ता ने अपने दादा की ओर से 1995 में मस्जिद निर्माण के लिए समर्पित भूमि और वहां नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी। साथ ही रमजान के महीने में नमाजियों की संख्या सीमित करने भी विरोध किया। हालांकि न्यायालय ने वर्तमान स्थिति में उस संरचना को मस्जिद नहीं माना लेकिन यह आदेश दिया कि वहां पहले से नमाज अदा की जाती रही है। इसलिए श्रद्धालुओं को वहां प्रार्थना करने से न रोका जाए।
न्यायालय ने " मैंराथन फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज" बनाम उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए दोहराया कि निजी संपत्तियों में धार्मिक कार्यों को लेकर कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की प्रशंसा की। कहा कि गणतंत्र की ताकत सहनशीलता और आपसी सम्मान में निहित है।
अनुच्छेद.25 न केवल आस्तिकों बल्कि नास्तिकों को भी अपने विचारों के प्रचार की स्वतंत्रता देता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को भेजी जाए ताकि इसे जमीनी स्तर पर प्रवर्तन अधिकारियों तक प्रसारित किया जा सके।
एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में कहा कि याची ने नमाजियों की संख्या सीमित किसने की यह नहीं बताया।

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