नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023, बीएचयू में महिलाओं की भागीदारी पर गरमाई चर्चा


वाराणसी, 12 अप्रैल (वार्ता) काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के महिला महाविद्यालय स्थित सावित्री बाई फुले सभागार में रविवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ विषय पर एक विस्तृत परिचर्चा एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों, शिक्षाविदों तथा सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और राष्ट्र निर्माण एवं नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने की। अपने संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता के लक्ष्य को लेकर समाज में व्यापक सहमति है, लेकिन वास्तविक चुनौती इसे प्राप्त करने के लिए संरचित और व्यावहारिक मार्गों की पहचान करने में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रगति को सुनियोजित और क्रमिक ढंग से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि उपलब्धियाँ स्थायी हों।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कुलपति ने बताया कि यह कानून 2023 में पारित हो गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन को 2029 तक निर्धारित किया गया है। इसके लिए जनगणना तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन जैसी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे विशाल देश में ये प्रक्रियाएँ जटिल होती हैं और काफी समय लेती हैं, क्योंकि ये निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व और संतुलन को निर्धारित करती हैं।
शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा करते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले विचारों की उत्पत्ति प्रायः विश्वविद्यालयों में होती है, जो समाज को प्रगति की राह पर ले जाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे व्यक्तियों के बजाय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि सार्थक और समाधानोन्मुख चर्चा ही प्रगति का आधार बनती है।
उन्होंने संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि लक्ष्य भले ही स्पष्ट हो, लेकिन उसे प्राप्त करने का मार्ग सावधानीपूर्वक निर्धारित किया जाना चाहिए। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस परिचर्चा से निकलने वाले बेहतर और सार्थक सुझावों के माध्यम से काशी हिंदू विश्वविद्यालय पूरे देश को राह दिखाने का कार्य करेगा।
कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने इस अधिनियम के दूरगामी परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्ष 2005 में लागू हुआ ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ (आरटीआई) सुशासन का प्रवेश द्वार साबित हुआ, उसी प्रकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि समावेशी समाज और वास्तविक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनेगा। यह देश के निर्णय-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करेगा।

केंद्रीय तिब्बती उच्च अध्ययन संस्थान, सारनाथ की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि महिला महाविद्यालय के प्रांगण में आना उन्हें हमेशा नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “आज हम केवल सशक्तिकरण की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में महिलाओं की सीधी हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं।” उन्होंने सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और पंचायत स्तर पर महिलाओं द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा की।

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