अप्रैल 2026 में भोर के आकाश में हो रहा है दुर्लभ धूमकेतु का दीदार


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अप्रैल 2026 के इन दिनों में भोर के समय आकाश में एक दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय नज़ारा देखने को मिल रहा है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह दृश्य धूमकेतु Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) नामक धूमकेतु का है, जो पृथ्वी के पास से गुजरते हुए इन दिनों स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस खगोलीय घटना ने खगोल विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले लोगों में खासा उत्साह पैदा कर दिया है।

क्या होता है धूमकेतु ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि धूमकेतु सौरमंडल के बर्फ, धूल और गैस से बने पिंड होते हैं। जब ये सूर्य के करीब पहुंचते हैं तो सूर्य की गर्मी के कारण इनसे गैस और धूल निकलती है, जिससे इनके चारों ओर चमकीला आवरण (कोमा) और लंबी पूंछ (टेल) बन जाती है। यही कारण है कि ये आकाश में एक चमकदार पूंछ वाले पिंड के रूप में दिखाई देते हैं। इन्हें अक्सर डर्टी स्नो बॉल भी कहा जाता है क्योंकि इससे कोमा ( चमकीला बादल) और टेल ( पूंछ) बनती है। लेकिन कभी कभी धूमकेतु की एक से अधिक पूंछ भी बन सकती हैं। 

कब खोजा गया था धूमकेतु, सी/2025 आर 3 पेन-स्टार्स  ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस धूमकेतु की खोज 2025 में हुई थी,और अब अप्रैल में लंबे समय बाद इसकी वापसी हुई है जिसे हम पृथ्वी से देख सकते हैं। या कुछ यूं कहें कि इस धूमकेतु की खोज सितंबर 2025 में Pan-STARRS सर्वे (हवाई, अमेरिका) द्वारा की गई थी। लेकिन पृथ्वी से अब ठीक से दृश्यमान नज़ारा देखने को मिल रहा है, खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह एक दीर्घ-अवधि धूमकेतु है, जो लगभग 1.7 लाख वर्षों बाद सौरमंडल के आंतरिक भाग में लौटा है। इस कारण इसे अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना माना जा रहा है।

कब से कब तक है, इस धूमकेतु को देखने का सर्वोत्तम समय?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस धूमकेतु Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) को देखने के लिए आपको 10 से 20 अप्रैल के बीच सर्वोत्तम दृश्यता मिल सकती है। क्योंकि 10 से 20 अप्रैल 2026 के बीच यह धूमकेतु सबसे अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसके बाद इसकी स्थिति में परिवर्तन होने के कारण भारत में इसे देखना कुछ कठिन हो सकता है।

क्या होता है धूमकेतु का निकट बिंदु (उपसौर)?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस धूमकेतु का निकट बिंदु (उपसौर) 19 अप्रैल 2026 को है, इसे ही इसका पेरिहेलियन भी कहा जाता है। इस समय यह सबसे ज्यादा चमकीला हो सकता है, लेकिन

 सूर्य के बहुत पास होने की वजह से देखना थोड़ा सा कठिन भी हो जाता है।


क्या होता है,पेरिहेलियन या उपसौर ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पेरिहेलियन (Perihelion) का हिंदी में अर्थ "उपसौर" या "सूर्य समीपक" होता है। यह वह स्थिति होती है जब पृथ्वी या कोई अन्य खगोलीय पिंड (जैसे धूमकेतु) अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में सूर्य के सबसे निकट होता है पेरिहेलियन (उपसौर) से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कक्षा का वह बिंदु है जहाँ सूर्य और किसी खगोलीय पिंड के बीच की दूरी सबसे कम होती है। इसका मूल शब्द ग्रीक भाषा के "पेरी" (निकट) और "हेलियोस" (सूर्य) से मिलकर बना है। एवम् इसके विपरीत स्थिति को अपसौर' (Aphelion) कहा जाता है या कुछ यूं कहें कि इसका उल्टा अपसौर' (Aphelion) होता है, जब कोई खगोलीय पिंड,सूर्य से सबसे दूर होता है।

कितने बजे से कितने बजे तक देख सकते हैं इस धूमकेतु को ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आप इस शानदार खगोलीय नज़ारे को भोर में सुबह लगभग 4:30 से 5:30 बजे तक किसी अच्छी दूरबीन आदि से अच्छी तरीक़े से देख सकते हैं। क्योंकि भारत में यह धूमकेतु भोर में सुबह लगभग 4:30 से 5:30 बजे के बीच सबसे ज्यादा अच्छा दिखाई दे रहा है।

किस दिशा में देखें इस धूमकेतु को?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आपको इस धूमकेतु Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) को सही से देखने के लिए दिशा का भी ज्ञान होना जरूरी है इसीलिए आप इसको पूर्व एवं पूर्व-उत्तर 

की दिशा में देखेंगे तो आप इसको आसानी से पहचान सकते हैं लेकिन इसको क्षितिज के पास (नीचे) साफ आसमान प्रकाश प्रदूषण रहित जगहों एवम् ग्रामीण इलाकों में और खुले क्षेत्र एवम् ऊंची जगहों में इसे देखना अधिक आसान होगा। और कुछ जगहों से जहां पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण रहित ऊंचाई वाली पहाड़ी आदि जगह से यह भी संभावना बन सकती है कि अगर यह धूमकेतु पूरी तरह से विघटित नहीं हुआ तो कुछ एक विशेष जगहों से साधारण आंखों से भी दर्शन संभव होने की संभावना बन सकती है। आजकल आकाश में अभी 18 अप्रैल 2026 तक पेगासस तारामण्डल में दिखाई दे रहा है लेकिन इसके बाद 19 एवम् 20 अप्रैल 2026 को मीन (पिसकस) तारामंडल की ओर दिखाई देगा।


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस धूमकेतु की चमक लगभग प्लस 8 से 6 तक के मैग्नीट्यूड के बीच आंकी गई है। क्योंकि ऐसे धूमकेतुओं का मैग्नीट्यूड विभिन्न परिस्थितियों के कारण काफ़ी बदलता भी है ऐसे में पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण रहित क्षेत्रों में इसे नंगी आंखों से देखना संभव हो भी सकता है। या यह भी हो सकता है कि सूर्य के पास आने से दृश्यता कम भी हो सकती है, इसीलिए इस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है, हालांकि इन दिनों में किसी अच्छी दूरबीन एवम् विशेष (बाइनोकुलर) के उपयोग से इसका दृश्य और भी स्पष्ट हो जाता है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह समय इस घूमकेतु की फोटोग्राफी के लिए अनुकूल अवसर है और समस्त खगोल प्रेमियों के लिए यह एक सुनहरा मौका भी है। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार DSLR या मिररलेस कैमरा, ट्राइपॉड तथा सही सेटिंग (ISO 800–3200, 5–15 सेकंड एक्सपोजर) के साथ ही कुछ विशेष जगहों से इस धूमकेतु की तस्वीरें ली जा सकती हैं।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि धूमकेतुओं की चमक और दृश्यता समय के साथ बदल सकती है। इसलिए इच्छुक लोग इस समय का लाभ उठाकर शीघ्र अवलोकन करें। शहरों की रोशनी से पूर्णतः दूर जाकर देखने पर हमेशा ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भोर के समय दिखाई दे रहा Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) न केवल एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, बल्कि आम नागरिकों को ब्रह्मांड के अद्भुत रहस्यों को करीब से देखने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। इसीलिए समस्त खगोलप्रेमियों को इस अवसर का लाभ सूर्योदय से लगभग एक से डेढ़ घंटे पहले अवश्य उठाना चाहिए।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 17 अप्रैल 2026 को अमावस्या पर चंद्रमा, आकाश में दिखाई नहीं दे रहा होगा, इस दरम्यान इस धूमकेतु को देखने की संभावना और भी शानदार बन सकती है। साथ ही 19 अप्रैल तक भोर में पूर्व से थोड़ा उत्तर दिशा की तरफ 04:30 से 5:30 बजे के मध्य होगा धूमकेतु कॉमेट सी/2025 आर 3 (पैन-स्टार्स) का दीदार ।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि धूमकेतु कॉमेट सी/2025 आर 3 (पैन-स्टार्स) वैसे तो यह धूमकेतु बीते पिछली 10 अप्रैल 2026 से ही दृश्यमान हो रहा है, लेकिन आगे आने वाले दो से चार दिनों में यह धूमकेतु विशेष रूप से नजर आएगा। साथ ही 19 अप्रैल को यह सूर्य के सर्वाधिक निकट होने की पूरी संभावना है।

क्या हैं धूमकेतुओं की प्राचीन मान्यताएं?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्राचीन समय में कुछ सभ्यताओं द्वारा इन्हें अशुभ संकेत भी माना जाता था। लेकिन आधुनिक खगोल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आज जान चुके हैं कि कोई भी धूमकेतु केवल अति सुन्दर एवम् शानदार खगोलीय नज़ारे ही प्रस्तुत नहीं करते बल्कि साथ ही ब्रह्माण्ड की आदिम जानकारियों को अपने गोपनीय पिटारे में साथ लेकर, कभी पास से तो कभी अति दूर से आने वाले विशेष मेहमान की तरह होते हैं। जिनका अध्ययन विश्व वैज्ञानिक समुदायों द्वारा गहराई से किया जाता है।

                 धन्यवाद।


                 

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© खगोलविद अमर पाल सिंह, एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश,भारत।

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ईमेल आईडी amarpal2250@gmail.com

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