बिजली विभाग की लापरवाही से दोनों हाथ गंवाने वाले बच्चे को मिलेगा 26 लाख 65 हज़ार रुपए का मुआवजा
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बचपन में बिजली विभाग की लापरवाही के चलते दोनों हाथ गंवाने वाले पीड़ितो को बड़ी राहत दी है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने पप्पू की प्रथम अपील पर यह आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद (यूपीपीसीएल) पीड़ित को 26 लाख 65 हज़ार रुपये का मुआवजा दे।
आगरा के नगला पदी स्थित प्राइमरी स्कूल के पास एक मार्च 1997 को सात साल की उम्र में याची पप्पू खेल रहा था। वहीं पर एक 11 हजार वोल्ट का खुले में ट्रांसफार्मर रखा हुआ था। इस ट्रांसफार्मर के चारों ओर कोई फेंसिंग या सुरक्षा घेरा नहीं था। पप्पू अचानक ट्रांसफार्मर की चपेट में आ गया। करंट के कारण बच्चे के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गया और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए कंधे के नीचे से दोनों हाथ काटने पड़े।
पीड़ित ने अपने पिता के माध्यम से मुआवजे के लिए वाद दायर किया था , जिसे वर्ष 2005 में ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह हादसा बच्चे की अपनी लापरवाही के कारण हुआ। इसके खिलाफ पीड़ित ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह गलत ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 7 साल के बच्चे से तर्कसंगत सोच या सावधानी की उम्मीद नहीं की जा सकती और उस पर लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
न्यायालय ने अपने फैसले में कठोर दायित्व के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि बिजली एक खतरनाक वस्तु है और इसकी आपूर्ति करने वाली संस्था की यह जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे। विभाग यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि बच्चा खुद ट्रांसफार्मर के पास गया था। हाईकोर्ट ने 26 लाख 65 हज़ार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
न्यायालय ने कहा कि यह राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में एफडी की जाए , जिससे याची को मासिक ब्याज मिलता रहे और उसका जीवनयापन हो सके। न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को इस डिक्री का लाभ दिलाने में पूरी मदद करे।
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