मुख्यमंत्री योगी करेंगे पूर्वी यूपी के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन


गोरखपुर 14 अप्रैल (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमपीआईटी) में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) के सहयोग से बनने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ बुधवार को करेंगे।

एमपीआईटी पूर्वी उत्तर प्रदेश में देश की आजादी से पहले शिक्षा की अलख जगा रहे महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी शिक्षण संस्थान है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन अवसर पर .एआई अवेयरनेस फॉर आल. ट्रेनिंग वर्कशॉप का भी शुभारंभ होगा। इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों की संख्या के लिहाज से विश्व कीर्तिमान रचने की भी तैयारी की गई है।
इस अवसर पर टीसीएस एवं टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन भी उपस्थित रहेंगे।
एमपीआईटी में टीसीएस के सहयोग से पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुआ है। इसे विश्व स्तरीय मानक के अनुरूप विकसित किया गया है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के ढांचागत निर्माण पर 19.35 करोड़ रुपये, फर्नीचर व फर्निशिंग पर 2.40 करोड़, ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर पर 1.84 करोड़, एआई सेंटर पर 9.56 करोड़, स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर पर 2.09 करोड़, साइबर सिक्योरिटी सेंटर पर 6.19 करोड़ और थ्री डी प्रिंटिंग सेंटर पर 6.79 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉम्प्लेक्स में ड्रोन टेक्नोलॉजी एंड थ्री डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्युरिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्युरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, थ्री डी प्रिंटिंग समेत एकीकृत पाठ्यक्रम संचालित होंगे।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार एमजीयूजी की स्थापना पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुंच के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वर्तमान समय में यह विश्वविद्यालय आठ संकायों मेडिकल साइंसेज, आयुर्वेद, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल साइंसेज, हेल्थ एवं लाइफ साइंसेज, फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, एग्रीकल्चर, कॉमर्स एवं मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर एप्लिकेशन के माध्यम से 43 कार्यक्रम संचालित कर रहा है। एमजीयूजी आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत के साथ समन्वित करने में भी जुटा है। विश्वविद्यालय में पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ;सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन. स्थापित है जिसे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली ;आइकेएस. पहल के अंतर्गत ..सेंटर ऑफ एक्सीलेंस.. के रूप में मान्यता प्राप्त है। विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा ;हेल्थकेयर. मेडिकल टूरिज्म ;मेडिकल टूरिज्म, हेल्थ साइंस एजुकेशन तथा अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और नव नेतृत्व पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत. विकसित उत्तर प्रदेश.2047 के दृष्टिकोण को साकार करना है। एमजीयूजी ने जीवन और पेशेवर कार्यों के सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ;एआईल के बढ़ते महत्व को स्वीकार कर उसके अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में एआई और डेटा साइंस की बुनियादी दक्षताओं को शामिल किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य एआई साक्षरता को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना है।
एमजीयूजी ने दो प्रमुख अस्पतालों महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय ;बालापार रोड, और गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय ;गोरखनाथ के माध्यम से एक सशक्त अकादमिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। ये संस्थान मेडिकल, आयुर्वेद, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को व्यापक क्लिनिकल अनुभव प्रदान करते हैं तथा आसपास के समुदायों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद अस्पताल और पंचकर्म केंद्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर इसके विशेष फोकस को और सुदृढ़ करते हैं।
130 एकड़ में विस्तृत विश्वविद्यालय परिसरए 3400 से अधिक छात्रों और 500 से अधिक संकाय सदस्यों के साथ एक गतिशील शैक्षणिक समुदाय का निर्माण करता है जो समग्र व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करता है। एमजीयूजी एक नवाचार, अनुसंधान और मूल्य.आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है। विश्वविद्यालय में 1400 से अधिक बैठने की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम उपलब्ध है जहां विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
इसके अतिरिक्त एमजीयूजी में 10 हजार से अधिक दर्शक क्षमता वाले स्टेडियम का निर्माण प्रगति पर है जो इनडोर और आउटडोर खेलों को बढ़ावा देगा। परिसर में 150 से अधिक औषधीय पौधों वाली आयुष वाटिका भी विकसित की गई है जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के अध्ययन और अनुसंधान को समर्थन प्रदान करती है। विश्वविद्यालय प्रति वर्ष 1200 से अधिक छात्र एनएसएस और एनसीसी स्वयंसेवकों के माध्यम से सामाजिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है। साथ ही पांच निकटवर्ती गांवों को गोद लेकर वहां ग्रामीण समुदायों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह का कहना है कि एमजीयूजी स्वयं को ज्ञान, नवाचार और करुणामय सेवा के केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है जो सांस्कृतिक मूल्यों में निहित और तकनीकी उत्कृष्टता से प्रेरित है। यह एक ऐसे समग्र शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित होने की आकांक्षा रखता है जहां परंपरा और आधुनिकता का संगम होता है और ज्ञान समाज सेवा में परिवर्तित होता है।


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