न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजा त्यागपत्र
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरण हो कर आये न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना इस्तीफा भेज दिया है | इसके साथ ही दिल्ली उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत को भी इसकी एक कॉपी भेजी है |
न्यायाधीश यशवंत वर्मा पाँच अप्रैल 2025 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शपथ लिया था | लेकिन 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास मे आग लगने के दौरान 500 – 500 के नोटों के बंडल जले मिले थे,इसके बाद उनका इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरण कर दिया गया था | न्यायालय मे शपथ ग्रहण के बाद उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी | मामले कि जाँच पूरी होने तक उन्हें न्यायिक कामों से दूर रखा गया था |
राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को नौ अप्रैल को भेजे पत्र के अनुसार “ मैं आप के सम्मानित कार्यालय को उन कारणों से परेशान नहीं करना चाहता, जिनकी वजह से मुझे यह पत्र लिखना पड रहा है | लेकिन गहरे दुख के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूँ | इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान कि बात रही है |
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने 22 मार्च को न्यायाधीश वर्मा पर लगे आरोपों कि इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कि थी | समिति ने चार मई को मुख्य न्यायाधीश को अपनी रिपोर्ट सौंपी | इसमे न्यायाधीश वर्मा को दोषी ठहराया गया था |
इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि न्यायाधीश वर्मा के इस्तीफे के बाद उनके खिलाफ हो रही सभी कारवाई बंद हो जाएगी | न्यायाधीश वर्मा का इस्तीफा जनता कि जीत है | उन्होंने कहा कि इस्तीफा एक चाल के तहत दिया गया है | उन्होंने कहा कि यदि इंपिचमेंट होता तो उनकी सर्विस और बेनीफिट्स सब सीज हो जाते | इनको पेंशन , सुरक्षा, पूरे परिवार को स्वास्थ्य लाभ और नौकर सभी सुविधा मिलती रहेगी| न्यायधीश वर्मा ने इस्तीफा देकर अपने को सभी सुविधाओं से सुरक्षित कर लिया है | उन्होंने कहा कि सरकार उनके इस्तीफा रद्द कर इंपीचमेंट प्रोसिडिंग्स आगे ले जाए और इनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज करे |
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