संविधान और धर्मनिरपेक्षता की मर्यादा बनाये रखें सरकारें : मायावती


लखनऊ, 18 मई ( वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद जारी हिंसा को लेकर चिंता जताते हुये केंद्र और राज्य सरकारों को धर्मनिरपेक्षता और संविधान की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी।

सुश्री मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा, “ सरकारों को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव या जातीय द्वेष का आरोप लगे। भारत की दुनिया भर में अच्छी और अनोखी मानवतावादी पहचान बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संविधान से है, जो पूरी तरह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित है। संविधान सभी धर्मों के लोगों को एक-समान आदर-सम्मान, जान-माल और मजहब की आजादी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।”
उन्होने पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरांत हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद सरकारों को अराजकता के विरुद्ध सख्त हो जाना चाहिए। ताकि किसी भी सरकार पर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात का दोष न लगे। यह अति-चिंता की बात होनी चाहिए।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जनहित में बनाए गए कानूनों का अनुपालन सभी धर्मों के लोगों पर एक समान रूप से होना चाहिए। संविधान और कानून की मान-मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि कानूनों का इस्तेमाल धार्मिक व जातीय भेदभाव, पक्षपात व द्वेष के बिना हो। इससे सरकारें सर्वसमाज व सर्वधर्म हितैषी लगेंगी और उनकी संवैधानिक गुडविल प्रभावित नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात कठिन हैं और समस्याएं दुखदायी हैं। ऐसे में सभी सरकारों को विशेष मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि विध्वंसकारी इमेज के जरिए लोगों का ध्यान बांटने का प्रयास करना चाहिए। इससे राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि क्राइसिस के हालात और बढ़ेंगे, जो देश व जनहितैषी नहीं होगा।

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