बिना कर्ज गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण का दावा, नौ साल में यूपी बना ‘रेवेन्यू सरप्लस’: योगी
लखनऊ, 4 मई ( वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश अब अपने संसाधनों के बल पर बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं पूरी करने में सक्षम हो चुका है।उन्होंने दावा किया कि करीब 600 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण बिना बैंकों से कर्ज लिए किया गया, जिस पर 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।
सोमवार को लोकभवन में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के 371 तथा स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के 129 नवचयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे के किनारे नौ औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर कुल मिलाकर 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और उसे ‘बीमारू’ राज्य माना जाता था। उस समय बैंक भी कर्ज देने में रुचि नहीं दिखाते थे। “आज स्थिति बदल चुकी है और उत्तर प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन गया है। ” उन्होने कहा कि सरकार बनने के समय खजाना खाली था और चुनावी वादों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि उस दौर में वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया, जिसका परिणाम है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि लखनऊ में जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) परियोजना वित्तीय कुप्रबंधन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 200 करोड़ रुपये की परियोजना लागत बढ़कर 860 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, इसके बावजूद काम अधूरा है। उन्होंने बताया कि आबकारी से होने वाली आय 12 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये हो गई है, जो राजस्व रिसाव रोकने का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। “किसी प्रकार की सिफारिश या भेदभाव की गुंजाइश नहीं है। चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर किया गया है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2017 से पहले भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं और पेपर लीक आम बात थी, जिससे युवाओं को नुकसान उठाना पड़ता था।

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