वकीलों के बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित होने के बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिए थी-श्रीनाथ त्रिपाठी


देवरिया 17 मई (वार्ता) बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा है कि लखनऊ में सिविल न्यायालय एवं पुराने उच्च न्यायालय के बाहर वकीलों के बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद ही प्रशासन को बुलडोजर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीड के आदेश पर रविवार को लखनऊ के सिविल कोर्ट और पुराने हाई कोर्ट के बाहर बने वकीलों के अवैध बने चैंबरों को नगर निगम और पुलिस प्रशासन बुलडोजर के माध्यम से ध्वस्त कराकर अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है। अवैध बने चैंबरों पर जब बुलडोजर ने कार्रवाई शुरू की, तो बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और नारेबाजी शुरू कर दी।
इस दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया था।वकील समाज इस कार्रवाई से आक्रोशित है।
श्री श्रीनाथ त्रिपाठी ने यहां "यूनीवार्ता" संवाददाता से दूरभाष पर कहा कि अवैध चैंबरों को हटाने की कार्रवाई उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच के आदेश पर की गयी है। उन्होंने कहा कि वकीलों के बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही नगर निगम और लखनऊ पुलिस को यह कार्रवाई करनी चाहिए थी।
देवरिया कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर मिश्रा उर्फ प्रितम ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश का पालन करना हम सभी का कर्तव्य है। लेकिन लखनऊ प्रशासन को भी सोचना चाहिए था कि वकीलों के लिए बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था करने के बाद ही यह कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने पुलिस द्वारा बल प्रयोग की निन्दा की।

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