Sun Halo (22° Halo) क्या होता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्य के चारों ओर दिखा 22 डिग्री सन हेलो, लोगों ने कैमरों में किया कैद।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश में शुक्रवार को एक अद्भुत खगोलीय दृश्य देखने को मिला, जब सूर्य के चारों ओर एक विशाल गोलाकार चमकीला घेरा दिखाई दिया। खगोलविद ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक भाषा में इसे “22 डिग्री सन हेलो” कहा जाता है। इस दुर्लभ दिखने वाली प्रकाशीय घटना को देखकर लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह घटना पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म बर्फीले क्रिस्टलों के कारण बनती है। जब सूर्य का प्रकाश इन षट्भुजीय (Hexagonal) बर्फ क्रिस्टलों से गुजरता है, तब प्रकाश का अपवर्तन होता है और सूर्य के चारों ओर लगभग 22 डिग्री के कोण पर चमकीला वृत्त बन जाता है।
क्या यह कोई अलौकिक या रहस्यमयी घटना होती है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कोई अलौकिक या रहस्यमयी घटना नहीं, बल्कि पूर्णतः प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक प्रकाशीय प्रक्रिया है। यह घटना सामान्यतः ऊँचाई पर बनने वाले पतले बर्फीले बादलों, जिन्हें Cirrostratus Cloud कहा जाता है, के दौरान दिखाई देती है। यह मौसम परिवर्तन का संकेत भी हो सकता है
अमर पाल सिंह के अनुसार, सन हेलो कई बार आगामी मौसम परिवर्तन, पश्चिमी विक्षोभ या वर्षा प्रणाली के आने का संकेत भी माना जाता है। हालांकि हर बार इसके बाद बारिश हो, यह आवश्यक नहीं है।
खगोलविज्ञान में क्या होता है Sun Halo?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि Sun Halo एक वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है, जो सूर्य के चारों ओर चमकीली रिंग के रूप में दिखाई देती है। यह घटना (Refraction)परावर्तन एवं अपवर्तन और (Atmospheric Optics) वायुमंडलीय प्रकाशिकी से जुड़ी होती है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने लोगों को सलाह दी है कि सूर्य को सीधे लंबे समय तक न देखें, क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
Sun Halo या 22° Halo सूर्य के चारों ओर दिखाई देने वाला एक गोल चमकीला प्रकाश-वृत्त (ring) होता है। यह एक अत्यंत प्रसिद्ध वायुमंडलीय प्रकाशीय (Atmospheric Optical) घटना है।
इसे “22-degree halo” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह वृत्त सूर्य से लगभग 22 डिग्री कोणीय दूरी पर बनता है।
यह कोई अलौकिक, धार्मिक या रहस्यमयी घटना नहीं है, बल्कि पूर्णतः वैज्ञानिक कारणों से बनने वाली घटना है।
यह क्यों बनता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसका मुख्य कारण है ,ऊँचाई पर मौजूद Cirrostratus Clouds (पतले बर्फीले बादल)
उनमें उपस्थित लाखों सूक्ष्म hexagonal ice crystals (षट्भुजीय बर्फ क्रिस्टल)
सूर्य के प्रकाश का Refraction (अपवर्तन) करते हैं और जब सूर्य का प्रकाश इन बर्फीले क्रिस्टलों से गुजरता है, तब प्रकाश मुड़ता (bend) है और लगभग 22° पर सबसे अधिक तीव्रता से निकलता है।
इसी कारण आकाश में सूर्य के चारों ओर एक वृत्त दिखाई देता है।
22° ही क्यों?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया यह सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक भाग है कि बर्फ के षट्भुजीय (hexagonal) क्रिस्टलों का कोण लगभग 60° होता है और जब प्रकाश इनसे गुजरता है, तब न्यूनतम विचलन (minimum deviation) लगभग 22° के आसपास बनता है,इसीलिए
यह कोण प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों से निकलता है और पृथ्वी के वायुमंडल में सबसे सामान्य halo इसी कोण पर दिखाई देता है।
Halo बनने की वैज्ञानिक प्रक्रिया क्या होती है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब ऊँचे बादल आमतौर पर 5 से 10 किमी ऊँचाई पर मौजूद पतले बर्फीले बादलों में बर्फ क्रिस्टल होते हैं।
उनमें,सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता है या यूं कहें कि सूर्य का प्रकाश क्रिस्टल में प्रवेश करता है, और प्रकाश मुड़ता है
क्रिस्टल के अंदर प्रकाश का अपवर्तन होता है।इसके कारण 22° पर प्रकाश केंद्रित दिखाई देता है और हमारी आँखों तक एक वृत्ताकार पैटर्न पहुँचता है।
Halo में रंग क्यों दिखाई देते हैं?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह बिल्कुल इंद्रधनुष जैसा नहीं होता, लेकिन इसमें हल्के रंग दिखाई दे सकते हैं क्योंकि अलग-अलग तरंगदैर्घ्य (wavelengths)
अलग-अलग मात्रा में अपवर्तित होते हैं,आमतौर पर अंदर की ओर लाल रंग और बाहर की ओर नीला या हल्का सफेद दिख सकता है।
क्या Halo मौसम का संकेत देता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि कई बार ऐसा भी होता है क्योंकि यह अक्सर Cirrostratus clouds से बनता है, जो आने वाले मौसम परिवर्तन या फ्रंट सिस्टम का संकेत हो सकते हैं और कई बार यह बारिश के कुछ घंटे बाद भी बनता है एवं बारिश ,पश्चिमी विक्षोभ और तूफानी प्रणाली आ सकती है। लेकिन हर Halo के बाद बारिश हो ,यह जरूरी नहीं।
क्या चंद्रमा के आसपास भी Halo बनता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा के आस पास भी हेलो बनता है इसे Moon Halo कहते हैं ,यह बिल्कुल उसी प्रक्रिया से बनता है, केवल प्रकाश स्रोत सूर्य की जगह चंद्रमा होता है।
क्या Halo खतरनाक होता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह पूर्णतः प्राकृतिक और सुरक्षित वायुमंडलीय घटना है,लेकिन सूर्य को सीधे लंबे समय तक देखने से आँखों को नुकसान हो सकता है।
क्या Halo पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर भी बन सकता है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सैद्धांतिक रूप से यह संभव होता है यदि किसी ग्रह के वायुमंडल में बर्फ क्रिस्टल एवं उपयुक्त तापमान,और प्रकाश स्रोत मौजूद हों, तो halo जैसी प्रकाशीय घटनाएँ बन सकती हैं।
क्या यह दुर्लभ (Rare) घटना है?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह बहुत दुर्लभ नहीं, लेकिन हर दिन भी नहीं दिखती है,यह तब दिखाई देती है जब ऊँचे बर्फीले बादल सही आकार के ice crystals,और उचित सूर्य की स्थिति पर मौजूद हों साथ ही ठंडे क्षेत्रों और सर्द मौसम में इसकी संभावना अधिक होती है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से मुख्य बिंदु यह होते हैं यह (Atmospheric Optics) वायुमंडलीय प्रकाशिकी की घटना है। और संक्षिप्त में कहा जाय तो इस प्रकार समझ सकते हैं कि इसके कुछ मुख्य कारण इस प्रकार होते हैं जब Ice crystal refraction और सबसे सामान्य प्रकार 22° Halo जोकि Cirrostratus clouds इसका प्रमुख स्रोत हैं।
यह पृथ्वी के वायुमंडल की संरचना और प्रकाशिकी का शानदार उदाहरण है। इस से संबंधित वैज्ञानिक अवधारणाएँ कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि अपवर्तन ,जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाकर मुड़ता है और (Atmospheric Optics)
वायुमंडलीय प्रकाशिकी वायुमंडल में प्रकाश से बनने वाली घटनाओं का अध्ययन
(Ice Crystal Optics)
हिम क्रिस्टल प्रकाशिकी / बर्फ क्रिस्टल प्रकाशिकी
बर्फ के क्रिस्टलों से बनने वाली प्रकाशीय घटनाओं का अध्ययन
(Dispersion)
वर्ण विक्षेपण / प्रकाश का वर्ण-विभाजन ,जब श्वेत प्रकाश अलग-अलग रंगों में बंट जाता है एवं (Cirrostratus Cloud)
सिरोस्ट्रेटस बादल आदि
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि Sun Halo या 22° Halo सूर्य के चारों ओर बनने वाला प्रकाशीय वृत्त है, जो ऊँचाई पर मौजूद बर्फ क्रिस्टलों द्वारा सूर्य के प्रकाश के अपवर्तन से बनता है। यह पूर्णतः वैज्ञानिक घटना है और पृथ्वी के वायुमंडलीय प्रकाशिकी (Atmospheric Optics) का अत्यंत सुंदर उदाहरण माना जाता है।
@खगोलविद अमर पाल सिंह नक्षत्र शाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत।

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