प्राकृतिक आपदा में 24 घंटे के भीतर राहत पहुंचा कर जनता का भरोसा बढ़ा रही योगी सरकार


लखनऊ, 11 जून ( वार्ता) प्रकृति केवल जीवन नहीं देती, आपदा भी लाती है। आंधी, मूसलाधार बारिश या आकाशीय बिजली जैसे प्रकोप किसानों की खड़ी फसल मिनटों में नष्ट कर देते हैं, छतें उड़ा ले जाते हैं और परिवारों का आशियाना छीन लेते हैं। कई बार जान भी जाती है, जिसके घाव बरसों तक भरते नहीं।

उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में तेज हवाओं, भारी बारिश और आकाशीय बिजली ने फिर दिखाया कि मनुष्य प्रकृति के सामने कितना असहाय है। ऐसे समय में लोगों के मन में स्वाभाविक सवाल उठता है – क्या उनकी पीड़ा को कोई सुन रहा है, क्या कोई उनके दुख को समझ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने त्वरित राहत उपायों और प्रभावितों को सहायता पहुंचाकर इसका जवाब दिया। 24 घंटे के भीतर राहत, जिलों में तेजी से मदद का वितरण और मंत्रियों का पीड़ितों के पास पहुंचना यह दर्शाता है कि संकट के समय जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था सक्रिय की गई है ।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योगी सरकार का मूलमंत्र “आपदा में अवसर नहीं, आपदा में सेवा” अब प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश जैसा बड़ा राज्य, करोड़ों किसान, लाखों गांव और हजारों मजरे – इतने बड़े विस्तार में मशीनरी को सक्रिय और संवेदनशील रखना आसान नहीं। इसलिए राहत सिर्फ घोषणा नहीं रही, जमीन पर पहुंची।
उन्होंने कहा कि अधिकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहे, खेतों और गांवों में उतरे। बीते नौ वर्षों में यह बदलाव नेतृत्व के कार्यकाल में लगातार दिख रहा है। जब भी आपदा आती है, मुख्यमंत्री नुकसान का जायजा लेते हैं, अधिकारियों से फीडबैक लेते हैं और बचाव अभियान के साथ 24 घंटे के भीतर राहत राशि वितरित कराते हैं।
वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि प्रभावित जिलों में प्रभारी मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर गए, राहत बांटी और शोकाकुल परिवारों से मिले। जब कोई मंत्री दुखी किसान के पास बैठकर आंख में आंख डालकर हाथ थाम लेता है और भरोसा दिलाता है कि सरकार साथ खड़ी है, तो यह सिर्फ राजनीतिक कवायद नहीं रहती। यह मानवीय जुड़ाव बनता है और आपदा से टूटा विश्वास फिर से जुड़ता है।
उन्होंने बताया कि किसान की खड़ी फसल नष्ट हो या आकाशीय बिजली किसी मेहनती परिवार को अंधकार में धकेल दे, उसे तुरंत मदद चाहिए, महीनों बाद मिलने वाले लाभ नहीं। योगी सरकार ने इन कदमों से किसानों को यह संदेश दिया है कि उनकी परेशानी सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है और त्वरित संज्ञान लिया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि आपदा में राहत देना केवल करुणा नहीं, राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। सरकार का दायित्व है कि वह नागरिकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाए और नुकसान होने पर उबरने में मदद करे। लेकिन जब यह जिम्मेदारी निभाई जाती है, तो राहत सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं रहती – वह एकजुटता का संकेत बन जाती है, जो टूटे लोगों में आत्मविश्वास लौटाती है।
अधिकारियों के मुताबिक इस कठिन दौर में योगी सरकार ने लोगों को भरोसा दिया है कि सरकार सार्वजनिक पीड़ा के प्रति उदासीन नहीं है। आपदा के समय यह विश्वास दिलाया गया है कि लोग अकेले नहीं हैं। उनके पीछे एक सरकार खड़ी है, जो उनकी जरूरतों के प्रति सजग और उनकी कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील है।

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