संगीतमय श्रीराम कथा के समापन पर धर्म, संस्कार और आदर्श जीवन का संदेश, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
गोरखपुर(दुर्गेश मिश्र) । खोराबार क्षेत्र के जूही इंक्लेव स्थित महाराणा प्रताप पार्क में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का समापन रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिवस पर कथा वाचक बाल व्यास पंडित सूर्य प्रकाश मिश्र (प्रयागराज) ने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, राम-भरत के त्यागमय प्रेम, हनुमान जी की अद्वितीय भक्ति तथा सुग्रीव की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया।
कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। कथा के दौरान पूरा परिसर श्रीराम के जयघोष, भजनों और धार्मिक नारों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु कथा के प्रत्येक प्रसंग को श्रद्धा और भाव-विभोर होकर सुनते रहे। कथा वाचक ने कहा कि श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, सत्य, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उनके जीवन का प्रत्येक प्रसंग समाज को कर्तव्य, अनुशासन और नैतिकता की शिक्षा देता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों, पारिवारिक विघटन, स्वार्थ और नैतिक पतन से जूझ रहा है, तब भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने की आवश्यकता पहले से अधिक है। श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजसिंहासन छोड़कर वनवास स्वीकार किया, जिससे त्याग और कर्तव्यपालन की सर्वोच्च मिसाल स्थापित हुई। वहीं भरत ने भाई के प्रति प्रेम और सम्मान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आज भी विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है।
कथा के दौरान राम-रावण युद्ध का विस्तृत वर्णन करते हुए पंडित मिश्र ने कहा कि धर्म और अधर्म का संघर्ष अनादिकाल से चला आ रहा है। रावण के पास ज्ञान, शक्ति और वैभव सब कुछ था, लेकिन अहंकार ने उसे पतन की ओर धकेल दिया। इसके विपरीत भगवान श्रीराम ने धर्म, सत्य, करुणा और मर्यादा के बल पर विजय प्राप्त की। यह प्रसंग मानव जीवन को यह शिक्षा देता है कि असत्य और अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
हनुमान जी के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण और गुरु-भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण हनुमान जी हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया। वहीं सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता हमें विश्वास, सहयोग और सच्ची मित्रता का महत्व समझाती है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में हनुमान जैसी सेवा भावना और सुग्रीव जैसी निष्ठा विकसित कर ले, तो उसके जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
कथा वाचक ने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य बोलना, माता-पिता का सम्मान करना, जरूरतमंदों की सहायता करना, समाज में सद्भाव बनाए रखना और मानवता की सेवा करना भी धर्म का ही स्वरूप है। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति को संस्कारित करता है और समाज को संगठित एवं सशक्त बनाता है। सनातन संस्कृति का मूल उद्देश्य सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है।
समापन अवसर पर वैदिक विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न कराया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्र की उन्नति के लिए आहुतियां अर्पित कीं। इसके पश्चात भगवान श्रीराम की भव्य आरती की गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम के अंत में दिव्य पीतांबरा फाउंडेशन द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजकों ने बताया कि सनातन परंपरा में अन्नदान को महादान माना गया है और भंडारे का उद्देश्य समाज में सेवा, सहयोग और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में केडी तिवारी, कुणाल तिवारी, सोना तिवारी, प्रभात तिवारी, कार्तिकेय सिंह, कृष्णा सिंह, आशु जायसवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का विशेष योगदान रहा। सभी सहयोगियों ने कथा, हवन, भंडारे और अन्य व्यवस्थाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर उपस्थित संत-महात्माओं, आचार्यों और विद्वानों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन केवल आध्यात्मिक चेतना ही नहीं जगाते, बल्कि समाज में संस्कार, एकता, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धर्म का प्रचार-प्रसार और सनातन संस्कृति की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है तथा ऐसे आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने, धर्म और संस्कृति की रक्षा करने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों के प्रसार का संकल्प लिया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण देर शाम तक बना रहा।
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