गंगा की पवित्रता से समझौता नहीं—मानकों के अनुरूप ही छोड़ा जाएगा उपचारित जल :केसरवानी


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि गंगा की पवित्रता से समझौता नहीं—मानकों के अनुरूप ही  जीवन दायनी गंगा में उपचारित जल छोड़ा जाएगा ।

   महापौर ने गंगा नदी में बिना उपचारित जल छोड़े जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को 43 एमएलडी क्षमता वाले बक्शी बांध स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य प्लांट की कार्यप्रणाली, जल शोधन की गुणवत्ता तथा पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

      महापौर ने स्पष्ट रूप से कहा कि गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा न केवल आस्था का प्रतीक नही है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

      निरीक्षण के दौरान महापौर ने एसटीपी से गंगा में प्रवाहित किए जाने वाले जल की गुणवत्ता की जांच मौके पर ही करवाई। उन्होंने बीओडी , सीओडी , टीएसएस  एवं पीएच वैल्यू की जांच सुनिश्चित कराई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपचारित जल निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। 

       महापौर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में बिना पूर्ण उपचार के जल को गंगा में प्रवाहित नहीं किया जाएगा।

   श्री केसरवानी ने प्लांट के विभिन्न महत्वपूर्ण तकनीकी इकाइयों का भी गहन निरीक्षण किया। उन्होंने इनलेट एनालाइजर यूनिट, ग्रिड यूनिट, एमबीबीआर  यूनिट तथा सीसीटी  यूनिट की कार्यप्रणाली, रखरखाव एवं संचालन की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक यूनिट की क्षमता और वर्तमान प्रदर्शन के बारे में पूछताछ करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

    उन्होंने स्थल पर निर्माणाधीन 50 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता एवं निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन की समीक्षा करते हुए संबंधित एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्यों को तेजी और गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए, ताकि शहर की सीवेज शोधन क्षमता में और वृद्धि हो सके तथा गंगा को प्रदूषण से और अधिक सुरक्षित किया जा सके।

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