कविता - तम्बाकू निषेध दिवस
सिगरेट और तम्बाकू छोड़ो, दिल करता बर्बाद।
यह तस्वीर देखकर कुछ, घटनाएँ आती याद।।
नशा रोज करता था शख़्स, तम्बाकू खाता रोज।
कहता खुलकर पी लो जी, व्यर्थ न जाए खोज।।
प्रति दिवस तम्बाकू खाकर, सिगरेट का कश लेता।
कितना भी समझाओ, बात पे कान नहीं वह देता।।
दर्द उठा ऐसा तब दिल में, साँस को भी मोहताज।
जीवन पल दो जी न सका, कुछ समझो बन्धु आज।।
खोता कोई पिता भाई को, कहीं सुहाग उजड़ता।
सिगरेट तम्बाकू जो खाता, विपदाओं से लड़ता।।
सेहत घर परिवार के खातिर, इसको मारो लात।
सिगरेट जीवन नरक बनाता, मान लो मेरी बात।।
निषेध दिवस ये तम्बाकू का, इसको जड़ से मिटाओ।
मत पीना सिगरेट तुम बन्धु, खुद को स्वस्थ बनाओ।।
दिल फेफड़ो पे घात ये करता, जीवन छीन है लेता।
कुछ तो समझो बात को प्यारे, चित्र संदेश जो देता।।
डाॅ०(कु०)शशि जायसवाल, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
@स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित कृति।
दिनांक - 13/06/2026
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