डग्गामारी और अतिक्रमण की चुनौतियों के बीच मुनाफे का रिकॉर्ड कायम किए हुए है यूपी रोडवेज


अमरोहा, 10 जुलाई (वार्ता) राष्ट्रीय राजमार्ग-09 पर डग्गामार वाहनों की बढ़ती गतिविधियों, अवैध टैक्सी स्टैंडों, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता जैसी चुनौतियों के बावजूद उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) विगत एक दशक से लगातार लाभ अर्जित कर देश के अन्य परिवहन निगमों के लिए मिसाल बना हुआ है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल के रामपुर, अमरोहा और संभल जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित अधिकांश प्रमुख चौराहे और पारंपरिक बस अड्डे अतिक्रमण की चपेट में हैं। इससे रोडवेज बसों के नियमित संचालन और सवारी उठाने में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। परिणामस्वरूप निगम के राजस्व पर असर पड़ रहा है और यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
अमरोहा जिले के औद्योगिक नगर गजरौला में मुख्य चौराहों के आसपास फुटपाथों और सर्विस रोड पर अवैध कब्जों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। रोडवेज कर्मियों का आरोप है कि कुछ लोग अवैध वसूली के उद्देश्य से बसों को निर्धारित स्थानों पर रुकने नहीं देते। पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण कई बसों को मजबूरन फ्लाईओवर से गुजरना पड़ता है, जिससे बसों की प्रतीक्षा कर रहे स्थानीय यात्रियों को डग्गामार वाहनों या निजी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ता है।
यूपी रोडवेज एंपलायज यूनियन का कहना है कि आम चुनावों के दौरान बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए बड़ी संख्या में बसों को चुनाव ड्यूटी में लगा दिया जाता है, जिससे दैनिक यात्रियों, छात्रों और बीमार लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में हसनपुर तहसील क्षेत्र में रोडवेज कर्मियों के साथ अभद्रता का मामला भी सामने आया। आरोप है कि साइड न देने के विवाद में कुछ दबंगों ने रोडवेज बस की चाबी जबरन निकाल ली और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की। इस दौरान पुलिस की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी रही। घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
मुरादाबाद मंडल के सेवा प्रबंधक अनुराग यादव ने बताया कि वर्ष 1972 में गठित उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम देश का एकमात्र ऐसा परिवहन उपक्रम है, जो इतनी चुनौतियों के बावजूद पिछले दस वर्षों से लगातार मुनाफे में है। उन्होंने कहा कि मुरादाबाद-दिल्ली मार्ग निगम के लिए प्रमुख रूट है, जहां 24 घंटे में औसतन करीब 100 बसों का संचालन होता है और लगभग हर दस मिनट पर एक बस उपलब्ध रहती है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा परिवहन की तरह उत्तर प्रदेश में भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और सशक्त किए जाने की आवश्यकता है। एक बस में औसतन 60 यात्री सफर कर सकते हैं, जिससे सड़कों पर यातायात का दबाव कम होता है और ईंधन की भी बचत होती है।
उधर, आगामी सावन कांवड़ यात्रा और शिवरात्रि पर्व को देखते हुए हरिद्वार मार्ग पर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। एआरएम केसी गौड़ के अनुसार 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा और 11 अगस्त को पड़ने वाले शिवरात्रि पर्व के मद्देनजर हरिद्वार रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिल्ली समेत अन्य मार्गों से बसों को समायोजित कर प्रतिदिन 15 से 20 अतिरिक्त बसें हरिद्वार भेजी जाएंगी। आवश्यकता पड़ने पर बसों की संख्या और बढ़ाई जाएगी तथा 24 घंटे निरंतर बस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
डग्गामारी, अतिक्रमण, प्रशासनिक चुनौतियों और विभिन्न परिस्थितियों से होने वाले नुकसान के बावजूद उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन कही जाने वाली यूपी रोडवेज का लगातार मुनाफे में बने रहना न केवल एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, बल्कि देश के अन्य राज्य परिवहन निगमों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

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