सुरक्षित बेटियाँ–सशक्त परिवार, समृद्ध समाज के लिए जिला प्रशासन का व्यापक जनजागरूकता अभियान


देवरिया, 16 जुलाई। महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा "सुरक्षित बेटियाँ–सशक्त परिवार, समृद्ध समाज" विषयक विशेष संवाद एवं जनजागरूकता कार्यक्रम यूट्यूब लाइव के माध्यम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी श्री मधुसूदन हुल्गी ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति उसकी बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से मापी जाती है। यदि प्रत्येक बेटी सुरक्षित होगी तो परिवार सशक्त होगा और परिवार सशक्त होगा तो समाज एवं राष्ट्र स्वतः समृद्ध होगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन द्वारा महिलाओं और बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, पोषण एवं पुनर्वास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब ग्राम स्तर तक इनके बारे में व्यापक जानकारी पहुंचे और प्रत्येक पात्र व्यक्ति इनसे जुड़ सके। उन्होंने ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, स्वयं सहायता समूहों, शिक्षकों एवं समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाकर प्रत्येक पात्र परिवार तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, महिला हिंसा, मानव तस्करी, बाल भिक्षावृत्ति एवं लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध समाज को सामूहिक रूप से आगे आना होगा। केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और संवेदनशीलता के माध्यम से ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि पंचायत स्तर पर बालिकाओं की आयु का सत्यापन, जन्म पंजीकरण तथा विद्यालयों में नियमित नामांकन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे और बाल विवाह जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा और प्रत्येक महिला शासन की प्राथमिकता है तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


 महिला कल्याण एवं प्रोबेशन विभाग ने दी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी 

कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) एवं स्पॉन्सरशिप योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि निराश्रित बच्चों, बाल श्रम अथवा भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चों तथा असाध्य रोगों से प्रभावित परिवारों के बच्चों के लिए शासन द्वारा आर्थिक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया केवल विधिक रूप से निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ही की जानी चाहिए। इसके लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी संकटग्रस्त अथवा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे की सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें, ताकि समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


 बाल कल्याण समिति ने अभिभावकों से संवाद बढ़ाने की अपील की 

बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की अध्यक्ष डॉ. सावित्री राय ने कहा कि बाल कल्याण समिति ऐसे बच्चों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए कार्य करती है जिन्हें देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्यकता होती है। उन्होंने बालिकाओं के पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें, उनकी समस्याओं को समझें तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास करें। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला है।


वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं की दी गई जानकारी 

कार्यक्रम में बताया गया कि घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न अथवा किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से एक ही स्थान पर चिकित्सकीय सहायता, पुलिस सहायता, विधिक परामर्श, मनोसामाजिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

महिलाओं से अपील की गई कि किसी भी प्रकार की हिंसा अथवा उत्पीड़न की स्थिति में बिना संकोच महिला हेल्पलाइन 181 अथवा 9695647149 पर संपर्क करें, जिससे तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।


 श्रम विभाग ने निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी 

सहायक श्रमायुक्त ने निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ई, राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, मनरेगा श्रमिक सहित अन्य पात्र निर्माण श्रमिक जनसेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से अपना पंजीकरण कराकर विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पंजीकृत श्रमिकों को शिशु मातृत्व एवं बालिका मदद योजना, विवाह सहायता, शिक्षा सहायता सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाता है। साथ ही श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए संचालित अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया एवं सुविधाओं की भी जानकारी दी गई।

जिलाधिकारी श्री मधुसूदन हुल्गी ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक उनका प्रभावी लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे समाज का कोई भी कमजोर वर्ग लाभ से वंचित न रहे।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील समाज ही विकसित समाज की पहचान है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह बाल विवाह, बाल श्रम, महिला उत्पीड़न तथा किसी भी प्रकार के शोषण की सूचना संबंधित विभागों को उपलब्ध कराए तथा शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग करे।

कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से आह्वान किया कि शासन द्वारा संचालित महिला एवं बाल कल्याण संबंधी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा किसी भी प्रकार की सहायता, शिकायत अथवा परामर्श के लिए संबंधित विभागीय कार्यालयों एवं हेल्पलाइन सेवाओं का निःसंकोच उपयोग करें। उन्होंने कहा, "सुरक्षित बेटियाँ ही सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की सबसे मजबूत नींव हैं।"

कार्यक्रम का यूट्यूब लाइव के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया, जिससे जनपद के ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशा बहुओं, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में  जुड़कर कार्यक्रम का लाभ प्राप्त किया।

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